वेद वाणी का आदर ही सुख शांति का आधार-स्वामी राम स्वरूप जी

Respect for the voice of the Vedas is the foundation of happiness and peace – Swami Ram Swarup Ji.


कठुआ, 22 जून । वेद मन्दिर योल में आयोजित 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 72वें दिन स्वामी राम स्वरूप जी योगाचार्य ने जिज्ञासुओं को अथर्ववेद के काण्ड 12 के माध्यम से वेद वाणी के महत्व पर गहन आध्यात्मिक उपदेश दिए।

स्वामी जी ने कहा कि वेद वाणी ईश्वर से उत्पन्न दिव्य ज्ञान है जो साधारण रूप से प्राप्त नहीं होती बल्कि इसके लिए तपस्या, ब्रह्मचर्य और धर्मानुष्ठान का पालन आवश्यक होता है। जो साधक वेद मार्ग पर चलकर संयमित जीवन अपनाता है वही इस शुद्ध एवं सत्य ज्ञान को प्राप्त करने का अधिकारी बनता है।

उन्होंने आगे बताया कि वेद वाणी को हृदय में दृढ़ करने के लिए ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा आवश्यक है। यज्ञ के माध्यम से इस दिव्य वाणी का आदर, मान-सम्मान और प्रसार होता है। यदि मनुष्य यज्ञ और वेद वाणी का सम्मान नहीं करता तो वह अनजाने में पाप का भागी बनता है। स्वामी जी ने कहा कि वेद वाणी सम्पूर्ण विश्व के लिए है और प्रत्येक मानव का कर्तव्य है कि वह इसका आदर करे और इसके बताए मार्ग पर चले। चारों वेद इस दिव्य ज्ञान को प्राप्त करने का साधन हैं और परमेश्वर ही इसका मूल स्रोत है।

अपने प्रवचन में उन्होंने अथर्ववेद के एक मंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस स्थान पर वेद वाणी का अपमान या उसका प्रसार रोका जाता है वहां यह वाणी भयावह रूप धारण कर लेती है और अधर्म हिंसा तथा अशांति को जन्म देती है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जब समाज में वेद विद्या का ह्रास होता है तब अधर्म और उपद्रव बढ़ते हैं जिससे मानव जीवन में दुःख और अशांति फैलती है। इसलिए सुख, शांति और समृद्धि के लिए वेद वाणी का अध्ययन, प्रचार और पालन अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने स्वामी जी के उपदेशों को ध्यानपूर्वक सुना और वेद मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

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