ब्रह्मपुत्र को आर्थिक गलियारे के रूप में विकसित करेगी केंद्र सरकार : सर्बानंद सोनोवाल

नई दिल्ली, 19 मई (हि.स.)। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि केंद्र सरकार ब्रह्मपुत्र नदी को पूर्वोत्तर क्षेत्र के बहुउद्देशीय आर्थिक गलियारे के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। इसके तहत परिवहन, व्यापार, पर्यटन और नदी प्रबंधन को एकीकृत रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगले पांच वर्षों में पूर्वोत्तर क्षेत्र में अंतर्देशीय जलमार्ग विकास पर लगभग 4,800 करोड़ रुपये निवेश किए जाएंगे।

असम के गुवाहाटी में मंगलवार को ब्रह्मपुत्र बोर्ड की उच्चस्तरीय समीक्षा बोर्ड बैठक में सोनोवाल ने कहा कि ब्रह्मपुत्र केवल एक नदी नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर की संपर्क व्यवस्था और आर्थिक विकास को गति देने वाली राष्ट्रीय संपत्ति है। उन्होंने कहा कि भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण राष्ट्रीय जलमार्ग-2 के रूप में घोषित ब्रह्मपुत्र नदी की क्षमता को विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। यह जलमार्ग असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र को भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल मार्ग के माध्यम से कोलकाता और हल्दिया बंदरगाहों से जोड़ता है।

उन्होंने कहा कि असम में लगभग 751 करोड़ रुपये की परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं, जिनमें पांडु, धुबरी और जोगीघोपा टर्मिनल, तैरते जेटी और तटीय सुविधाओं का उन्नयन शामिल है। इसके अलावा 1,100 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं पर कार्य जारी है, जिनमें जलमार्ग विकास, पोत मरम्मत सुविधा, पर्यटन जेटी और डिब्रूगढ़ में क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना शामिल है।

सोनोवाल ने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों में टिकाऊ जल प्रशासन को मजबूत करने के लिए राज्य जल सुधार ढांचा लागू करने की दिशा में भी काम कर रही है। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रबंधन, कटाव नियंत्रण, ड्रेजिंग और आधारभूत संरचना विकास को जोड़कर समेकित नदी विकास रणनीति अपनाना आवश्यक है, ताकि वर्षभर नौवहन सुनिश्चित किया जा सके।

बैठक में भौगोलिक सूचना प्रणाली, लिडार तकनीक और जलवैज्ञानिक मॉडलिंग जैसे आधुनिक तकनीकी उपायों के उपयोग पर भी चर्चा हुई। साथ ही ब्रह्मपुत्र बोर्ड को आधुनिक और प्रौद्योगिकी आधारित नदी बेसिन संगठन के रूप में विकसित करने की योजना पर विचार किया गया।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अंतर्देशीय जलमार्ग सड़क और रेल परिवहन का किफायती तथा पर्यावरण अनुकूल विकल्प बन रहे हैं। वर्ष 2014 में राष्ट्रीय जलमार्गों पर माल ढुलाई 18 मिलियन मीट्रिक टन थी, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 218 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक हो गई है।

उन्होंने बताया कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में 79 सामुदायिक जेटियों का विकास, पांडु में पोत मरम्मत सुविधा का विस्तार, डिब्रूगढ़ में क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र और सामरिक नदी बंदरगाहों पर सीमा शुल्क तथा आव्रजन सुविधाओं के विकास की योजना बनाई गई है। इसके साथ ही ड्रेजर, सर्वेक्षण पोत और मालवाहक बेड़े की खरीद तथा असम में शहरी जल परिवहन प्रणाली और क्रूज टर्मिनल विकसित किए जाएंगे।

बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी, असम पर्यटन मंत्री अजंता नियोग, अरुणाचल प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री बियूराम वाहगे, मणिपुर के पर्यटन मंत्री खुरैजाम लोकेन सिंह, मेघालय के जल संसाधन मंत्री मेटबाह लिंगदोह, मिजोरम के मंत्री पीसी वानलालरुआता, सिक्किम के मंत्री सोनम लामा और त्रिपुरा के उद्योग मंत्री संताना चकमा सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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