प्रसिद्ध फिल्म लेखिका पुबाली चौधरी ले रही छात्रों की वर्कशॉप
नेशनल और फिल्मफेयर अवार्ड जीत चुकी पुबाली लिखित फिल्में
रोहतक, 18 मई (हि.स.)। दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसीसुपवा) में इन दिनों छात्रों को फिल्मों की स्क्रीनप्ले राइटिंग (पटकथा लेखन) के तरीके सिखाए जा रहे हैं। इसके लिए फिल्म एंड टेलीविजन फैकेल्टी में वर्कशॉप लगाई जा रही है, जिसमें प्रसिद्ध फिल्म लेखिका पुबाली चौधरी छात्रों को टिप्स दे रही हैं। एफटीवी के एफसी महेश टीपी ने बताया कि पुबाली चौधरी फिल्मी पटकथा लेखन में बड़ा नाम है।
वे चर्चित हिन्दी फिल्म रॉक ऑन, काई पो चे व रॉक ऑन-टू के लिए पटकथा लिख चुकी हैं। इनमें से रॉक ऑन को साल 2008 में सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला, जबकि काई पो चे को साल 2014 में सर्वश्रेष्ठ स्क्रीनप्ले के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार हासिल हुआ। पुबाली चौधरी एफटीआईआई, पुणे में स्क्रीनप्ले लेखन विभाग में मेंटर और मानद विभागाध्यक्ष रह चुकी हैं। वे सुपवा में डायरेक्शन बैच के छात्रों की स्क्रीनप्ले वर्कशॉप लेने के लिए आई हैं। सुपवा के कुलगुरु डॉ अमित आर्य ने कहा कि हमारा प्रयास देश के सर्वश्रेष्ठ फिल्मी पटकथा लेखकों को छात्रों के बीच लेकर आना है, ताकि वे हमारे बच्चों को बॉलीवुड की जरूरत के मुताबिक तैयार कर सकें।
पुबाली चौधरी ने छात्रों को टिप्स देते हुए कहा कि स्क्रीनप्ले फिल्माए जाने के लिए लिखे जाते हैं, न कि पढ़े जाने के लिए। एक उपन्यासकार एक चरित्र के आंतरिक जीवन पर तीन पैराग्राफ खर्च कर सकता है, एक स्क्रीनराइटर को उसी भावनात्मक स्थिति को कार्रवाई, व्यवहार या संवाद के माध्यम से बाहर निकालना होगा। कैमरा केवल वही कैप्चर कर सकता है जो वह देख और सुन सकता है। आंतरिक स्थितियां लेंस के लिए तब तक अदृश्य हैं, जब तक वे भौतिक दुनिया में दिखाई न दें। उन्होंने कहा कि प्रारूप इस बाधा को मजबूत करता है।
मानक स्क्रीनप्ले प्रारूप लगभग स्क्रीन समय प्रति मिनट एक पृष्ठ चलता है। एक 90-मिनट की फिल्म लगभग 90 पृष्ठ है। हर शब्द की एक कीमत है, और दृश्य जो पढ़ने को धीमा करते हैं, काट दिए जाते हैं। पुबाली चौधरी ने कहा कि स्क्रीनप्ले सहयोगी दस्तावेज हैं। उन्हें निर्देशकों, निर्माताओं और अक्सर अन्य लेखकों द्वारा फिर से लिखा जाता है, इससे पहले कि कुछ भी स्क्रीन तक पहुंचे। यह किसी भी फिल्म का ब्लूप्रिंट है। इस बात को ध्यान में रखकर लिखना ही क्रिया लाइनों से लेकर चरित्र परिचय तक सब कुछ बदल देता है।
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