काशी के वरिष्ठ ग़ज़लकार सिद्धनाथ शर्मा का निधन, साहित्य जगत में शोक की लहर

वाराणसी, 10 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी काशी के वरिष्ठ ग़ज़लकार और कवि सिद्धनाथ शर्मा का मंगलवार देर रात निधन हो गया। वह 73 वर्ष के थे। लंबे समय से किडनी रोग से पीड़ित सिद्धनाथ शर्मा ने कबीर नगर, दुर्गाकुंड स्थित एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन का समाचार मिलते ही साहित्यकारों, कवियों और काव्यप्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई।

सिद्धनाथ शर्मा का जन्म वर्ष 1953 में वाराणसी के कालीमहाल (पानदरीबा) क्षेत्र में हुआ था। उनके पिता बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में कर्मचारी थे। तीन भाइयों में वह तीसरे स्थान पर थे। उनके बड़े भाई सोभनाथ शर्मा का पहले ही निधन हो चुका है, जबकि छोटे भाई अमरनाथ शर्मा हैं। अपने पीछे वह पत्नी द्रोपदी शर्मा और इकलौते पुत्र विशाल शर्मा को छोड़ गए हैं।

काशी की सांस्कृतिक और साहित्यिक परंपरा से गहरे जुड़े सिद्धनाथ शर्मा की शिक्षा-दीक्षा भी वाराणसी में ही हुई। उन्होंने अपने काव्य जीवन में काशी के अनेक प्रतिष्ठित कवियों और साहित्यकारों के साथ मंच साझा किया। उनमें चकाचक बनारसी, भैया जी बनारसी, गणेश प्रसाद सिंह मानव, चपाचप बनारसी और श्रीकृष्ण तिवारी जैसे साहित्यकार शामिल रहे, जो अब स्मृतिशेष हैं। सिद्धनाथ शर्मा को मंचीय प्रस्तुति और तरन्नुम में ग़ज़ल गायन की अद्भुत क्षमता के लिए जाना जाता था। उनकी ग़ज़लों की प्रस्तुति श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देती थी। शहर के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में उनकी सक्रिय भागीदारी रहती थी। विशेष रूप से होली के अवसर पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों में उनकी उपस्थिति दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय थी।

उनकी कई रचनाओं को व्यापक सराहना मिली। इनमें—

“नव नगद ना तेरह उधार चाहिए,

हमें तो सिर्फ तेरा प्यार चाहिए...”

“ना इधर जाइए, ना उधर जाइए,

वक्त की नज़ाकत है, सुधर जाइए...”

“अगर प्यार होता लखन-राम जैसा,

तो रिश्ते नहीं तोड़ पाता ये पैसा...”

जैसी पंक्तियां आज भी श्रोताओं और पाठकों के बीच लोकप्रिय हैं। उनका एक ग़ज़ल संग्रह भी प्रकाशनाधीन है, जो वर्तमान में प्रेस में है। बुधवार को उनकी अंतिम यात्रा पैतृक आवास कालीमहाल से निकली और मणिकर्णिका घाट पहुंची। वहां उनके पुत्र विशाल शर्मा ने मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में कवि, साहित्यकार, समाजसेवी और उनके प्रशंसक उपस्थित रहे। सभी ने अपने प्रिय कवि को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रद्धांजलि देने वालों में डॉ. जयशंकर जय, बुद्धदेव तिवारी, संतोष प्रीत, गोपाल केसरी, कंचन सिंह परिहार, कुमार महेंद्र, दिनेश दत्त, डॉ. अशोक अज्ञान, डॉ. सुभाष चंद्र, झरना मुखर्जी, क्षति द्विवेदी, दीपक शर्मा तथा मुन्ना पांडेय सहित अनेक गणमान्य लोग शामिल रहे।

   

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