हिमाचल के कृषि नवाचारों से प्रभावित हुए उत्तराखंड के अधिकारी

हमीरपुर, 01 जुलाई (हि.स.)। ज्ञान, नवाचार और आधुनिक कृषि तकनीकों के आदान-प्रदान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत उत्तराखंड के उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अधिकारियों ने हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना-2 (एचपीसीडीपी-2) का अध्ययन भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने परियोजना के सफल मॉडलों, आधुनिक तकनीकों और किसानों के हित में संचालित नवाचारों का गहन अध्ययन किया।

परियोजना मुख्यालय में आयोजित बैठक की अध्यक्षता परियोजना निदेशक डॉ. सुनील चौहान ने उत्तराखंड से आई टीम का स्वागत किया और परियोजना की कार्यप्रणाली, उद्देश्यों, प्रमुख उपलब्धियों तथा विभिन्न नवाचारों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एचपीसीडीपी-2 के माध्यम से जल संसाधन प्रबंधन, फसल विविधीकरण, आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रसार, गुणवत्तायुक्त पौध उत्पादन, किसानों की आय में वृद्धि तथा संस्थागत विकास की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं।

उत्तराखंड के उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की टीम में डॉ. रक्षिता भट्ट (नर्सरी नोडल अधिकारी, नैनीताल), डॉ. गायत्री पिपलिया (नर्सरी नोडल अधिकारी, पिथौरागढ़) तथा डॉ. ज्योति बजेली (सहायक निदेशक, झरमोला फार्म, उत्तरकाशी) शामिल थीं। बैठक में जिला परियोजना प्रबंधक (हमीरपुर) डॉ. संतोष शर्मा, विषय विशेषज्ञ अनु यादव तथा वरिष्ठ विपणन अधिकारी नितिका सोनी भी उपस्थित रहीं।

बैठक के बाद अधिकारियों ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, बड़ा (नादौन) का दौरा किया, जहां उन्होंने अत्याधुनिक नर्सरी प्रबंधन प्रणाली, संरक्षित खेती, उच्च गुणवत्ता वाले पौध उत्पादन, आधुनिक सिंचाई तकनीकों, पौध संरक्षण उपायों तथा किसानों के प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन इकाइयों का अवलोकन किया। विशेषज्ञों के साथ तकनीकी चर्चा के दौरान उन्होंने इन नवाचारों के क्रियान्वयन और किसानों को मिलने वाले प्रत्यक्ष लाभ की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

उत्तराखंड के अधिकारियों ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में अपनाई जा रही वैज्ञानिक एवं आधुनिक कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में एचपीसीडीपी-2 के माध्यम से किए जा रहे प्रयास किसानों के समग्र विकास की दिशा में अत्यंत प्रभावी हैं। उन्होंने परियोजना के गुणवत्तायुक्त पौध उत्पादन मॉडल, क्षमता निर्माण कार्यक्रमों तथा आधुनिक कृषि प्रबंधन प्रणाली को अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय बताया।

अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस अध्ययन भ्रमण से उन्हें अनेक नई तकनीकी जानकारियां और व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुए हैं, जिन्हें उत्तराखंड में बागवानी विकास एवं नर्सरी प्रबंधन को और अधिक सुदृढ़ बनाने में उपयोग किया जाएगा।

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