बेटे की मौत पर रुका मुआवजा, हाईकोर्ट से राहत:नाम की गलती से रुका था दावा, नाम में गड़बड़ी के कारण खारिज हुआ दावा
- DSS Admin
- Jun 18, 2026
बेटे की मौत के बाद सरकारी योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता से वंचित एक महिला को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से राहत मिली है। दस्तावेजों में नाम संबंधी त्रुटि के कारण उसका मुआवजा दावा खारिज कर दिया गया था। अब अदालत के हस्तक्षेप के बाद संबंधित अधिकारियों ने पोर्टल दोबारा खोलकर आवेदन पर विचार करने का भरोसा दिया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस जगमोहन बंसल ने भावना की याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश जारी किया। दोनों पक्षों की सहमति के बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता पंचकूला स्थित हरियाणा परिवार सुरक्षा न्यास के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर जरूरी दस्तावेज जमा कराए। इसके बाद संबंधित अधिकारी मुआवजा दावे पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई करेंगे। 26 वर्षीय बेटे की मौत के बाद किया था आवेदन याचिका के अनुसार भावना के 26 वर्षीय बेटे की 9 मई 2024 को मृत्यु हो गई थी। परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) के अनुसार परिवार की वार्षिक आय 1.80 लाख रुपए से कम थी। ऐसे में परिवार दीन दयाल उपाध्याय अंत्योदय परिवार सुरक्षा योजना के तहत आर्थिक सहायता पाने का पात्र था। बेटे की मौत के बाद भावना ने 23 मई 2024 को ऑनलाइन आवेदन कर मुआवजे की मांग की थी। नाम में गड़बड़ी के कारण खारिज हुआ दावा मामले की जांच के बाद हरियाणा परिवार सुरक्षा न्यास ने 16 दिसंबर 2024 को दावा खारिज कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि मृत्यु प्रमाणपत्र और परिवार पहचान पत्र में मृतक के पिता के नाम को लेकर अंतर था। इसी तकनीकी त्रुटि के कारण आवेदन मंजूर नहीं किया जा सका। भावना ने बाद में संबंधित विभाग से संपर्क कर दस्तावेजों में दर्ज त्रुटि को ठीक करवाया। इसके बाद उन्हें 4 मार्च 2025 को संशोधित मृत्यु प्रमाणपत्र भी जारी कर दिया गया। हालांकि, समस्या यह रही कि ऑनलाइन पोर्टल पर दोबारा आवेदन करने का विकल्प उपलब्ध नहीं था। महिला ने कई बार अधिकारियों को आवेदन और प्रतिनिधित्व भेजे, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया। हाई कोर्ट में सरकार ने दिया आश्वासन सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि यदि मृत्यु प्रमाणपत्र में दर्ज जानकारी को परिवार पहचान पत्र के अनुसार सही कर दिया गया है, तो हरियाणा परिवार सुरक्षा न्यास का मुख्य कार्यकारी अधिकारी पोर्टल दोबारा खोलने पर विचार करेगा। इससे याचिकाकर्ता अपना दावा फिर से प्रस्तुत कर सकेगी। महिला की ओर से भी इस प्रस्ताव पर सहमति जताई गई।

