जालंधर | राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ में पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वारियाणा डंपिंग साइट से जुड़े कथित पर्यावरणीय उल्लंघनों पर अपना शपथपत्र दाखिल किया है। यह याचिका सामाजिक एवं पर्यावरण कार्यकर्ता तेजस्वी मिन्हास ने वारियाना डंप पर कुप्रबंधन और नियमों के उल्लंघन को लेकर दायर की है। शपथपत्र इंजीनियर जतिन्दर सोनी, पर्यावरण अभियंता, क्षेत्रीय कार्यालय कपूरथला की ओर से दाखिल किया गया। बोर्ड ने अधिकरण को अवगत कराया कि वर्ष 2019 से कार्रवाई के बावजूद नगर निगम जालंधर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 का गंभीर उल्लंघन कर रहा है। पीपीसीबी ने बताया कि नगर निगम जालंधर पर 9.30 करोड़ का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया, जिसमें 90 लाख जमा हुए हैं और 8.40 करोड़ बकाया हैं। मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को होगी।

