पठानकोट में प्रवासियों की Verification की उठी मांग:व्यापारी बोले-सामरिक और सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील शहर, किरायेदारों का भी हो सत्यापन

सामरिक और सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले सीमावर्ती जिले पठानकोट में प्रवासी आबादी की लगातार बढ़ती संख्या को लेकर स्थानीय निवासियों के बीच चिंता का माहौल गहराने लगा है। शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और स्थानीय निवासियों ने इस गंभीर विषय पर जिला प्रशासन और पुलिस विभाग से तुरंत उचित कदम उठाने की अपील की है। शहर के व्यापारियों का कहना है कि शहर के कई मोहल्लों, औद्योगिक क्षेत्रों और बाहरी इलाकों में दूसरे राज्यों से आए मजदूरों और अन्य लोगों की संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में शहर की आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ रखने के लिए इन सभी का समय-समय पर पुलिस सत्यापन होना बेहद अनिवार्य है। सुरक्षा और कानून-व्यवस्था सबसे बड़ी प्राथमिकता: नितिन महाजन शहर के व्यापारी नितिन महाजन सहित अन्य निवासियों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी चिंताएं साझा करते हुए स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी राज्य, व्यक्ति या विशेष समुदाय का विरोध करना कतई नहीं है। उनका एकमात्र मकसद शहर की सुरक्षा और सामाजिक व्यवस्था को लेकर अपनी चिंता प्रशासन तक पहुंचाना है। महाजन का कहना है कि पठानकोट एक सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्र है। यदि इतनी बड़ी संख्या में लोग दूसरे राज्यों से आकर यहाँ रह रहे हैं, तो संबंधित विभागों और स्थानीय पुलिस द्वारा उनके पहचान पत्रों, आधार कार्ड और स्थायी पते का नियमानुसार सत्यापन किया जाना चाहिए। इससे शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलेगी और किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सकेगा। प्रवासियों के योगदान को भी सराहा, पर सुरक्षा से समझौता नहीं इस मुद्दे को उठाते हुए व्यापार मंडल ने एक बेहद परिपक्व और सकारात्मक दृष्टिकोण भी सामने रखा। उन्होंने खुले दिल से स्वीकार किया कि बाहरी राज्यों से आने वाले प्रवासी मजदूर और कुशल श्रमिक पठानकोट के विकास, निर्माण कार्यों और विभिन्न स्थानीय उद्योगों में एक महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। उनके बिना कई व्यापारिक और आर्थिक गतिविधियां अधूरी हैं। लेकिन, नागरिकों का यह भी तर्क है कि विकास के साथ-साथ सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द भी उतना ही जरूरी है। इसलिए प्रशासन को एक ऐसी नियमित प्रणाली विकसित करनी चाहिए, जिससे शहर में किराए पर या झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले हर बाहरी व्यक्ति का रिकॉर्ड स्थानीय थाने में दर्ज हो।मकान मालिकों और ठेकेदारों के लिए प्रवासियों का वेरिफिकेशन करवाना अनिवार्य और सख्त किया जाए और नियमित रूप से संदिग्ध क्षेत्रों में औचक चेकिंग अभियान चलाया जाए। व्यापारियों की मुख्य मांगें : अनिवार्य किरायेदार सत्यापन: शहर के जिन इलाकों में प्रवासी आबादी अधिक है, वहाँ के मकान मालिकों को अपने किरायेदारों का ब्योरा पुलिस को देने के लिए पाबंद किया जाए। ठेकेदारों की जवाबदेही: निर्माण कार्यों या फैक्ट्रियों में बाहरी लेबर लगाने वाले ठेकेदारों के पास उनके मजदूरों का पूरा रिकॉर्ड और उनके गृह राज्य की पुलिस का क्लीयरेंस सर्टिफिकेट होना चाहिए। नियमित रिकॉर्ड अपडेट: समय-समय पर संबंधित विभागों द्वारा शहर के अलग-अलग वार्डों में सर्वे कर प्रवासियों का डेटाबेस अपडेट किया जाए। अब प्रशासन के रुख पर टिकीं नजरें शहर के व्यापारियों ने कहा कि पठानकोट एक ऐसा शहर है जो पहले भी सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील दौर से गुजर चुका है। ऐसे में स्थानीय जनता द्वारा उठाई गई यह मांग पूरी तरह से तर्कसंगत और जनहित से जुड़ी हुई प्रतीत होती है। अब यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि स्थानीय लोगों द्वारा उठाए गए इन गंभीर मुद्दों पर जिला प्रशासन और पठानकोट पुलिस क्या कड़े कदम उठाती है। क्या आने वाले दिनों में शहर के भीतर एक व्यापक चेकिंग और वेरिफिकेशन ड्राइव चलाई जाएगी? शहर में शांति, सुरक्षा और भाईचारा बनाए रखने के लिए आगे क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

   

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