हरियाणा के हांसी को शीघ्र सेशन डिवीजन घोषित करवाएंगे : सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत

हांसी में सीजेआई सूर्यकांत को स्मृति चिन्ह भेंट करते उपायुक्त डॉ. राहुल नरवाल व एसडीएम राजेश खोथ।

-हांसी बार एसोसिएशन ने किया सीजेआई सूर्यकांत का स्वागत

हिसार, 09 जनवरी (हि.स.)। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत ने शुक्रवार को हरियाणा राज्य में स्थित हांसी में कहा कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की नीति के अनुसार रेवेन्यू डिस्ट्रिक्ट बनने पर सेशन डिवीजन घोषित होता है। वे हाईकोर्ट से निवेदन करेंगे कि हांसी को शीघ्र सेशन डिवीजन घोषित किया जाए तथा जमीन उपलब्ध होने पर यहां सेशन कोर्ट शुरू करवाई जाए।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बनने के बाद जस्टिस सूर्यकांत शुक्रवार को हांसी बार एसोसिएशन के कार्यक्रम में पहुंचे। यहां बार एसोसिएशन की ओर से पगड़ी पहनाकर व शॉल ओढ़ाकर उनका भव्य स्वागत किया गया। इससे पूर्व श्री कृष्णा प्रणामी पब्लिक स्कूल में बनाए गए हेलिपैड पर केबिनेट मंत्री रणबीर सिंह गंगवा तथा विधायक विनोद भयाना ने सीजेआई सूर्यकांत का फूलों का गुलदस्ता भेंट करते हुए स्वागत किया। पीडब्ल्यूडी विश्रामगृह में उपायुक्त डॉ. राहुल नरवाल, एसपी अमित यशवर्धन व एसडीएम राजेश खोथ ने स्वागत किया तथा पुलिस कर्मियों ने सीजेआई को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। कोर्ट परिसर स्थित बार एसोसिएशन के कार्यक्रम में पहुंचने से पूर्व पंजाब से आए रिटायर्ड फौजियों के बैंड द्वारा समारोह स्थल तक ले जाया गया।

इस अवसर पर वकीलों को संबोधित करते हुए सीजेआई सूर्यकांत वत्स ने कहा कि हांसी मेरी जन्म, कर्म भूमि और भावनात्मक भूमि है। उन्होंने कहा कि हांसी से उनकी बचपन की यादें जुड़ी हुई हैं। मेरे पिताजी की यहां ड्यूटी थी और मैंने पहली फिल्म हांसी के सिनेमा हॉल में देखी थी पिताजी मुझे साइकिल पर बैठाकर फिल्म दिखाने दिखाने के लिए सिनेमा घर ले कर गए थे। उन्होंने कहा कि 20 अप्रैल 1984 को आखिरी पेपर देने के बाद अगले ही दिन घरवालों ने कहा कि प्रैक्टिस शुरू कर दो। और मैं 21 अप्रैल 1984 से ही मैं कोर्ट में जाने लगा और 29 जुलाई को बार लाइसेंस मिल गया। मैं एक अनजान लड़का था और एक केस में आर्ग्युमेंट के बाद जज की सलाह हिसार से सिर्फ दो जोड़ी कपड़े लेकर चंडीगढ़ चला गया। वहां मुझे बड़े वकीलों का आशीर्वाद मिला। उन्होंने कहा कि आज दुनियाभर में हमारा ज्यूडिशरी सिस्टम नंबर वन है और दूसरे देश हमारे साथ एमओयू कर रहे हैं।

अपने संबोधन में सीजेआई ने हांसी को जिला बनाने पर विधायक विनोद भयाना सहित शहरवासियों को बधाई देते कहा कि यह काफी पुरानी मांग थी। जब मैं यहां जज था तो डिमांड आती थी कि जिला नहीं बनाते तो हमें सेशन जज की कोर्ट दे दो।

सीजेआई ने कहा कि दुनिया में कानून को लेकर इतनी जटिलताएं हैं। हांसी का वकील इंग्लैंड के केस को भी देख और सीख सके, ऐसी चीजें अपनाएं। आप अपनी छवि को सुधारें और ग्लोबल लेवल के वकील बनें। भाषा की बाधा आपके रास्ते में नहीं आनी चाहिए। मैं चाहता हूं कि ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े बार भी प्रतिस्पर्धा में आएं। दुनिया भर में हमारा ज्यूडिशरी सिस्टम नंबर वन है। यहां के मुकाबले ज्यूडिशरी सिस्टम और कहीं का नहीं है। दूसरे देश हमारे साथ एमओयू कर रहे हैं।

सीजेआई ने वकीलों से अनुरोध किया कि सब डिवीजन और डिस्ट्रिक्ट लेवल पर वकील मॉडर्न डे चैलेंज को स्वीकार करें। मॉडर्न डे प्रैक्टिस में अपने काम को कनवर्ट करना है। मैं चाहता हूं कि बड़े शहरों के वकील की तरह मॉडर्न डे चैलेंज को स्वीकार करें। टैक्नॉलाजी के अनुरूप एडवांस होना होगा। इसके लिए ट्रेनिंग कार्यक्रम ऑर्गेनाइज करें। दिल्ली, मुंबई या बाहर के लॉयर के सामने टिकना है, ऐसा वकील बनना होगा।

सीजेआई ने कहा कि 1950 में जब संविधान लागू हुआ था, तब यह नहीं सोचा गया था कि न्यायपालिका पर इतनी अधिक जिम्मेदारी आएगी। जिस हाईकोर्ट में 7 जजों की व्यवस्था थी, वहां अब 70 जजों की जरूरत पड़ने लगी है। न्यायिक व्यवस्था का विस्तार बढ़ता गया। लोगों के अधिकारों को पूरा करने के लिए न्यायपालिका की जरूरत पड़ी। जब भी विवाद होता है, तो लोग कहते हैं कि 'मैं तुझे कोर्ट में देख लूंगा'। ज्यूडिशरी में केस आने लगे, मगर सिस्टम इसके लिए तैयार नहीं था। देश ने जैसे-जैसे प्रगति की, वैसे ही न्यायपालिका ने भी प्रगति की है। हरियाणा ने ज्यूडिशरी इन्फ्रास्ट्रक्चर में नाम कमाया है। जिस रफ्तार से बोझ बढ़ा है, उस तरह से इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं बना। जो देश तरक्की कर रहे हैं, उनमें हमारी प्रति व्यक्ति आय बढ़ रही है। जब कोई भी देश विकास करता है, तो बाहर से निवेश आता है। फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (एफडीआई) जब भी आता है, तो पहले देखता है कि कानून और व्यवस्था, बाजार और ग्राहक की स्थिति कैसी है। जब कोई बाहर से आएगा, तो लोग यही देखेंगे कि ये सब देश में है या नहीं। देश में परिदृश्य बदल रहा है। पहले कोर्ट में गांव के झगड़े आते थे, मगर आज ट्रेंड बदल रहा है। देश में बदलाव हो रहा है। जिस देश की न्यायपालिका मजबूत होगी, निवेश वहीं आएगा। भारत में अब क्राइम का नेचर बदल रहा है। पहले जैसा क्राइम अब नहीं रहा। अब साइबर क्राइम आ गया है। डिजिटल अरेस्ट में मैंने संज्ञान लिया है। देश में उसको कैसे रोका जाए। 55 हजार करोड़ से ज्यादा साइबर क्राइम में चला गया। यह पैसा देश से बाहर ले जाया जा रहा है। टेक्नोलॉजी बढ़ने से साइबर क्राइम में इजाफा हुआ।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर