माैनी अमावस्या पर बिहार के सभी पवित्र घाटों पर लोगों ने लगाई आस्था की डुबकी

पटना, 18 जनवरी (हि.स.)। मौनी अमावस्या पर बिहार में राजधानी पटना के सभी गंगा घाटों एवं राज्यभर में कोसी, बाघमती और नारायणी के पावन तट पर भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने आस्था एवं श्रद्धा की डुबकी लगाई।

बक्सर के रामरेखा एवं अन्य प्रमुख घाटाें पर भी लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। स्नान के बाद पूजा-पाठ व दान-पुण्य किया। बक्सर के रामरेखा घाट पर बक्सर के अलावा शाहाबाद और गोपालगंज सिवान के भी श्रद्धालु आकर गंगा स्नान कर रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सूर्योदय से पूर्व मौन धारण कर गंगा स्नान करने, तिल, आंवला सहित अन्य वस्तुओं का दान करने और पितरों के लिए तर्पण करने का विशेष महत्व होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है और पुण्य मिलता है। स्नान और दान-पुण्य के बाद ही श्रद्धालु मौन व्रत तोड़ते हैं।

पश्चिम चंपारण जिले के भारत व नेपाल की सीमा के वाल्मीकिनगर स्थित नारायणी (गंडक) नदी में स्नान का अपना महत्व है। ऐसा माना जाता है कि माघ अमावस्या पर डुबकी लगाने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। स्नान और मेला को लेकर वाल्मीकि नगर पुलिस के अलावा एसएसबी भी सुरक्षा में तैनात रहे। शनिवार की रात बगहा एसपी रामानंद कौशल भी वाल्मीकि नगर पहुंच कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।

प्रत्येक वर्ष माघ अमावस्या पर उत्तरप्रदेश के गोरखपुर, महराजगंज, कुशीनगर आदि जिलों के साथ ही बिहार के कई जिलों तथा नेपाल से श्रद्धालु पवित्र स्नान के लिए वाल्मीकिनगर पहुंचते है। माघ अमावस्या पर वाल्मीकिनगर तथा सीमावर्ती त्रिवेणी में मेला का भी आयोजन किया जाता है। जिसमें बाहर से आनेवाले दुकानदारों के द्वारा श्रृंगार प्रसाधन, दैनिक जरूरत से संबंधी समानों के साथ ही बर्तन की दुकानें लगाया जाता है। जहां श्रद्धालुओं द्वारा खरीदारी की जाती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी