हिसार : विद्या, धन और ताकत का सकारात्मक इस्तेमाल जरूरी : प्रो. इन्द्र मणी

हकृवि में दो दिवसीय एएसएलआईपी कॉन्क्लेव शुरूहिसार, 08 जनवरी (हि.स.)। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के नेहरू पुस्तकालय की ओर से एसोसिएशन ऑफ सीनियर लाइब्रेरी एंड इनफार्मेशन प्रोफेशनल्स के सहयोग से ‘कोलब्रेटिव इंटेलिजेंस: बिल्डिंग स्मार्टर लाइब्रेरीज़ टुगेदर’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय एएसएलआईपी कॉन्क्लेव-2025 का शुभारंभ हुआ। कॉन्क्लेव के उदघाटन सत्र के दौरान वसंतराव नाइक मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ, परभणी, महाराष्ट्र के कुलपति प्रो. इन्द्र मणी मुख्य अतिथि रहे। कॉन्क्लेव में एएसएलआईपी के अध्यक्ष डॉ. आरपी कुमार, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र के पूर्व उपनिदेशक एवं मुख्य वक्ता डॉ. सुखदेव सिंह व एएसएलआईपी के सचिव डॉ. राज कुमार उपस्थित रहे। कॉन्क्लेव में देश भर के विभिन्न विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों एवं संस्थानों के लगभग 200 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं, जिनमें पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के विशेषज्ञ, विद्यार्थी, शोधार्थी, आईटी एवं उद्योग क्षेत्र के प्रतिनिधि शामिल हैं।प्रो. इन्द्र मणी ने गुरुवार काे अपने सम्बोधन में कहा कि विद्या का स्वरूप बदल गया है। जो भारतीय स्वरूप विद्या का है, वही सही विद्या है। विद्या विनम्रता देती है, अगर आप विनम्र नहीं है तो आप विद्वान हो सकते हैं विद्यावान नहीं। उन्होंने बताया कि मनुष्य अपने जीवन में अपने काम से जाना जाता हैं, नाम से नहीं। व्यक्ति में तीन तरह की समर्थता होती है जिनमें विद्या, धन और ताकत शामिल हैं। व्यक्ति को विद्या ज्ञान बांटने के लिए, धन दान करने के लिए तथा ताकत अच्छे कार्यों पर लगानी चाहिए। वर्तमान डिजिटल युग में पुस्तकालय केवल सूचना के भण्डार नहीं बल्कि ज्ञान सृजन, नवाचार और सहयोग के केंद्र बनते जा रहे हैं। डॉ. आरपी कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में पुस्तकालय समाज की बौद्धिक रीढ़ है। वे केवल जानकारी प्रदान नहीं करते, बल्कि ज्ञान के निर्माण, आलोचनात्मक सोच और सामाजिक विकास में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। बदलते समय के साथ पुस्तकालयों का स्वरूप भले ही बदल रहा हो, लेकिन उनका महत्व और उद्देश्य पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। डॉ. सुखदेव सिंह ने प्रिंट मीडिया, डिजिटल मीडिया, डेटा एनालिसिस, एआई, हयूमन इंटेलिजेंस सहित पुस्ताकलयों के महत्व और उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कॉन्क्लेव में हकृवि के पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. राजीव के पटेरिया ने सभी का स्वागत करते हुए दो दिवसीय कार्यक्रम की रुपरेखा के बारे में विस्तार से जानकारी दी। डॉ. सीमा परमार ने कार्यक्रम में धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया जबकि डॉ. कनिका रानी ने मंच संचालन किया। इस अवसर पर पूर्व पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. बलवान सिंह सहित कुलसचिव, विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, निदेशक, अधिकारी, वैज्ञानिक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर