जम्मू-कश्मीर में कैंसर के 51 हजार मरीज मुफ्त दवाओं और घर-द्वार जांच पर जोर
- MILAN SINGH JAMWAL
- Sep 22, 2026
श्रीनगर, 22 सितंबर। जम्मू-कश्मीर में कैंसर के लगभग 51 हजार मरीज हैं। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इत्तू ने मंगलवार को विधानसभा में यह जानकारी देते हुए कहा कि सरकार कैंसर की समय पर पहचान, जांच और उपचार सुविधाओं को मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर काम कर रही है।
विधायक मीर सैफुल्लाह के प्रश्न का उत्तर देते हुए मंत्री ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में दो राज्य कैंसर संस्थान काम कर रहे हैं। इनमें एक शेर-ए-कश्मीर आयुर्विज्ञान संस्थान (स्किम्स) सौरा और दूसरा राजकीय मेडिकल कॉलेज जम्मू में स्थापित किया गया है। दोनों संस्थानों में कैंसर की जांच, उपचार और अन्य विशेष ऑन्कोलॉजी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
मंत्री ने बताया कि इन दोनों संस्थानों की स्थापना केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की वित्तीय और तकनीकी सहायता से गैर-संचारी रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण संबंधी राष्ट्रीय कार्यक्रम के अंतर्गत की गई है। सरकार यहां बुनियादी ढांचे, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों, विशेषज्ञ डॉक्टरों और प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।
कई मरीजों में अंतिम चरण में चलता है बीमारी का पता
सकीना इत्तू ने कहा कि बड़ी संख्या में मरीजों को कैंसर का पता तब चलता है, जब बीमारी गंभीर या अंतिम चरण में पहुंच चुकी होती है। ऐसी स्थिति में उपचार कठिन और महंगा हो जाता है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग सामुदायिक और घर-द्वार स्तर तक स्क्रीनिंग सुविधाएं पहुंचा रहा है। जांच में संदिग्ध पाए जाने वाले लोगों को आगे की जांच और उपचार के लिए संबंधित अस्पतालों में भेजा जा रहा है।
सरकार के अनुसार जम्मू-कश्मीर में पेट एवं आंतों से संबंधित कैंसर, फेफड़ों का कैंसर और स्तन कैंसर प्रमुख रूप से सामने आ रहे हैं। इनके अतिरिक्त महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की रोकथाम और समय पर पहचान पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
बीपीएल और एएवाई मरीजों को मुफ्त दवाएं
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले बीपीएल और अंत्योदय अन्न योजना के पात्र कैंसर मरीजों को दवाएं मुफ्त दी जा रही हैं। पात्र मरीज आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में निर्धारित नियमों के अनुसार कैशलेस अथवा मुफ्त उपचार भी प्राप्त कर सकते हैं।
गरीब और जरूरतमंद कैंसर मरीजों को अतिरिक्त वित्तीय सहायता देने के लिए ‘कैंसर ट्रीटमेंट एंड मैनेजमेंट फंड फॉर पुअर’ के अंतर्गत भी मदद उपलब्ध है। यह सहायता निर्धारित पात्रता, नियमों और फंड की उपलब्धता के आधार पर दी जाती है।
कैंसर नियंत्रण के लिए शीर्ष समिति गठित
कैंसर की रोकथाम, स्क्रीनिंग, समय पर जांच, रेफरल और उपचार व्यवस्था में बेहतर तालमेल के लिए सरकार ने एक शीर्ष समिति का गठन भी किया है। स्किम्स के निदेशक को इसका नोडल अधिकारी बनाया गया है। समिति कैंसर नियंत्रण से संबंधित नीतियां और आवश्यक उपाय तैयार करने में सरकार का मार्गदर्शन करेगी।
गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से बचाव के लिए टीकाकरण शुरू
मंत्री ने सदन को बताया कि जम्मू-कश्मीर में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की रोकथाम के लिए टीकाकरण अभियान भी शुरू किया जा चुका है। इसके तहत 9 से 15 वर्ष आयु वर्ग की लड़कियों को एचपीवी टीका उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार स्तन और गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ स्क्रीनिंग कार्यक्रमों का भी विस्तार कर रही है।
मीर सैफुल्लाह ने प्रश्न उठाते हुए वर्ष 2024 के करीब 71 हजार कैंसर मरीजों के एक आंकड़े का उल्लेख किया था। हालांकि, स्वास्थ्य मंत्री ने सरकार की ओर से जम्मू-कश्मीर में कैंसर मरीजों की संख्या लगभग 51 हजार बताई।
सकीना इत्तू ने कहा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी कैंसर उपचार सुविधाओं को मजबूत करने के लिए बैठकें कर चुके हैं। विधायकों की ओर से दिए जाने वाले उपयोगी सुझावों पर सरकार विचार करेगी। उन्होंने कहा कि कैंसर से निपटने के लिए सरकारी प्रयासों के साथ समाज की भागीदारी और लोगों में जागरूकता भी अत्यंत आवश्यक है।

