सीतापुर, 01 जनवरी (हि.स.)। नववर्ष की उस ठिठुरती शाम जहां अधिकतर लोग अपने घरों में गर्म रजाइयों और मोबाइल पर शुभकामनाओं एवं होटल में दावतों तक सीमित थे, तो वहीं दूसरी तरफ सीतापुर जनपद के कस्बा कमलापुर की बेटी आरूषी तिवारी ने जश्न को सड़कों तक उतार दिया। आरूषी, जो “गुड़िया झूलाओ” जैसे सामाजिक अभियान के माध्यम से पहले ही बेटियों के अधिकारों की आवाज बन चुकी हैं, इस बार ठंड से जूझते गरीब परिवारों के लिए देवदूत बनकर सामने आईं।
आरूषी ने अपने निजी संसाधनों से गुरुवार नव वर्ष की शाम दो दर्जन से अधिक जरूरतमंद महिलाओं को गर्म शॉल वितरित की और मासूम बच्चों को सर्दी से बचाने वाली गरम कैप पहनाई। कई बच्चे ऐसे थे जिनके पैरों में चप्पल तक नहीं थी। यही नहीं, आरूषी ने बच्चों के साथ सड़क किनारे केक काटकर नया साल मनाया। उस केक में सिर्फ मिठास नहीं, बल्कि अपनापन, सुरक्षा और बराबरी का एहसास था। यह कोई दिखावा नहीं, बल्कि दिल से निकली सेवा थी, जिसने यह साबित कर दिया कि असली हीरो वही होता है जो दूसरों के लिए अपनी खुशी कुर्बान कर दे। उस दिन कमलापुर की गलियों में नववर्ष नहीं, बल्कि मानवता का उत्सव मनाया गया।
आरुषि तिवारी ने बताया कि जरूरतमंद की मदद कर नया साल मनाने की खुशी कुछ और ही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / Mahesh Sharma



