आमसू कांग्रेस की बी-टीम, प्रॉक्सी फ्रंट की तरह कर रहा काम : भाजपा

गुवाहाटी, 12 जनवरी (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने ऑल असम माइनॉरिटी स्टूडेंट्स यूनियन (आमसू) को कांग्रेस की बी-टीम बताते हुए आरोप लगाया है कि यह संगठन अपनी स्थापना के समय से ही कांग्रेस के प्रॉक्सी फ्रंट के रूप में काम करता आ रहा है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता रंजीब कुमार सरमा ने साेमवार काे कहा कि आमसू की स्थापना 31 मार्च, 1980 को ग्वालपाड़ा जिले के जलेश्वर में तत्कालीन कांग्रेस नेता दिवंगत हितेश्वर सैकिया की पहल पर हुई थी और तब से यह संगठन कांग्रेस का सहायक संगठन बनकर कार्य कर रहा है।

भाजपा प्रदेश मुख्यालय में मीडिया से बातचीत में सरमा ने कहा कि आमसू के संस्थापक अध्यक्ष अब्दुल हैनागिरी से लेकर हाल ही में इस्तीफा देकर कांग्रेस में शामिल हुए रेजाउल करीम सरकार तक, संगठन के लगभग सभी प्रमुख नेताओं ने आमसू को कांग्रेस के लिए “ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म” के रूप में इस्तेमाल किया और बाद में स्वयं कांग्रेस में शामिल हो गए। उन्होंने रेजाउल करीम सरकार द्वारा दिए गए सांप्रदायिक रूप से उकसाने वाले बयानों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि 11 जनवरी को उनका कांग्रेस में औपचारिक प्रवेश आमसू के कांग्रेस की बी-टीम होने के चरित्र को एक बार फिर उजागर करता है।

भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र, असम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष तथा जोरहाट से सांसद गौरव गोगोई की मौजूदगी में तथाकथित ‘मियां नेता’ रेजाउल करीम सरकार ने शिवसागर, जोरहाट और तिनसुकिया जैसे ऊपरी असम के ऐतिहासिक शहरों को धुबड़ी की तरह मियां-बहुल शहरों में बदलने की मंशा से कांग्रेस में शामिल होने की बात सार्वजनिक रूप से गौरव गोगोई के समक्ष कही। सरमा ने कहा कि गौरव गोगोई की मौन सहमति ने असम की राजनीति में गंभीर खतरे की घंटी बजा दी है।

सरमा ने आरोप लगाया कि भाजपा लंबे समय से चेतावनी देती आ रही है कि कांग्रेस पार्टी अंतर-निर्वाचन क्षेत्रीय पलायन के माध्यम से असम की जनसांख्यिकीय संरचना बदलने की गहरी साजिश में लगी हुई है और केवल सत्ता हासिल करने के लिए उसने असमिया अस्मिता, अस्तित्व और भविष्य को बांग्लादेशी मूल के प्रवासियों के हाथों गिरवी रख दिया है। उन्होंने कहा कि जब रेजाउल करीम सरकार ने शिवसागर, जोरहाट और तिनसुकिया को “एक और धुबड़ी” बनाने की बात कही, तब गौरव गोगोई का चुप रहना आत्मसमर्पण के समान है।

भाजपा प्रवक्ता के अनुसार, आमसू वास्तव में अल्पसंख्यकों का संगठन नहीं बल्कि केवल मियां मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करने वाला निकाय बन चुका है। उन्होंने दावा किया कि आमसू और कांग्रेस एक ही सिक्के के दो पहलू हैं तथा वर्तमान में आमसू की अधिकांश गतिविधियां गुवाहाटी के सिक्स माइल, पंजाबारी इलाके में स्थित धुबड़ी के सांसद के आवास से संचालित हो रही हैं। सरमा ने यह भी आरोप लगाया कि सामागुरी विधानसभा उपचुनाव में आमसू ने रकीबुल हुसैन के पुत्र तंजील हुसैन के लिए सक्रिय रूप से प्रचार किया।

रंजीब कुमार सरमा ने कहा कि आमसू के लगभग 95 प्रतिशत नेता, संस्थापक अध्यक्ष से लेकर रेजाउल करीम सरकार तक, अंततः कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि आज कांग्रेस का संचालन भीतर से आमसू के जरिए ही किया जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश