श्रीनगर के राजबाग में अवैध निर्माण पर ACB की FIR पूर्व टाउन प्लानर समेत कई अधिकारी नामजद

श्रीनगर, 19 अगस्त। जम्मू-कश्मीर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने श्रीनगर के राजबाग इलाके में झेलम नदी के फ्लड बेसिन और प्रतिबंधित फ्रिंज क्षेत्र में बहुमंजिला इमारत के कथित अवैध निर्माण तथा सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ACB पुलिस स्टेशन श्रीनगर में FIR संख्या 10/2026 दर्ज कर श्रीनगर विकास प्राधिकरण (SDA) और श्रीनगर नगर निगम (SMC) के कई तत्कालीन अधिकारियों सहित दो लाभार्थियों को नामजद किया गया है।

ACB के अनुसार, मामले में पहले संयुक्त औचक जांच (Joint Surprise Check) की गई थी। इसके बाद की गई विस्तृत सत्यापन प्रक्रिया में भवन निर्माण की अनुमति देने और बाद में स्वीकृत नक्शे में संशोधन किए जाने के दौरान कथित तौर पर गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।

प्लिंथ एरिया और ऊंचाई बढ़ाने की अनुमति देने का आरोप

जांच में आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी करते हुए भवन के प्लिंथ एरिया और ऊंचाई में काफी बढ़ोतरी की अनुमति दी। इस दौरान संबंधित विभागों से आवश्यक अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) भी हासिल नहीं किए गए थे। सत्यापन में करीब 2.9 कनाल सरकारी और कहचराई भूमि पर कथित अतिक्रमण का मामला भी सामने आया है। ACB का आरोप है कि बहुमंजिला इमारत का निर्माण ड्रेनेज इंफ्रास्ट्रक्चर के ऊपर तथा झेलम नदी के प्रतिबंधित फ्रिंज क्षेत्र में भी किया गया। ब्यूरो अब यह पता लगा रहा है कि नियमों के कथित उल्लंघन के बावजूद निर्माण को किस स्तर पर अनुमति या संरक्षण दिया गया और पूरे मामले में किन अधिकारियों की क्या भूमिका रही।

पूर्व अधिकारियों समेत दो लाभार्थी नामजद

FIR में तत्कालीन सीनियर टाउन प्लानर, SDA मुनीर अहमद खान, तत्कालीन ज्वाइंट कमिश्नर प्लानिंग, SMC आर.के. टुटू और तत्कालीन प्रभारी असिस्टेंट टाउन प्लानर, SMC उल्फत जान सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को नामजद किया गया है। इसके अलावा भवन निर्माण से जुड़े कथित लाभार्थियों के रूप में गुलजार अहमद शेख और परवीना अख्तर के नाम भी FIR में शामिल किए गए हैं।

पद के दुरुपयोग और आपराधिक साजिश का आरोप

ACB का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करते हुए आपराधिक साजिश के तहत अनधिकृत निर्माण और सरकारी भूमि पर अतिक्रमण को कथित रूप से सुविधाजनक बनाया। मामला जम्मू-कश्मीर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम संवत् 2006 की धारा 5(1)(d) सहपठित धारा 5(2) तथा रणबीर दंड संहिता (RPC) की धाराओं 447-A, 468 और 120 सहित अन्य लागू प्रावधानों के तहत दर्ज किया गया है।