जब कुछ न आये तो नेता बन जाओ का समय गया, आज डॉक्टर, इंजीनियर से लेकर किसान तक हैं विधानसभा के सदस्य: सतीश महाना

-86वां अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन शुरु

लखनऊ, 19 जनवरी (हि. स.)। उत्तर प्रदेश की विधानसभा में आज लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और उप्र की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का शुभारंभ किया। यह सम्मेलन उत्तर प्रदेश में चौथी बार आयोजित हाे रहा है।

अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का शुभारंभ के माैके पर यूपी विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि आमतौर पर राज्य की विधानसभा को यह अवसर लगभग 20 साल में एक बार मौका मिलता है। लोकसभा अध्यक्ष ने मेरे आग्रह को स्वीकार किया। इससे पहले 2015 में यूपी विधानसभा ने पीठासीन अधिकारी सम्मेलन की मेजबानी की थी। आज एक बार फिर हमें यह मौका मिला है। महाना ने कहा कि पहले यह कहा जाता था कि जब कुछ न आये तो नेता बन जाएं। अब बदल गया है, अब वही नेता बन सकता है जिसे सब कुछ आये। हमारी विधानसभा में डॉक्टर, इंजीनियर, अधिवक्ता, प्रोफेसर, किसान, बिजनेसमैन भी चुनकर आये हैं। उन्हाेंने कहा कि लोकतंत्र में सभी का योगदान है और सबकी अपनी सीमाएं हैं। अगले तीन दिन तक इस विधानसभा में जनता के प्रति जवाबदेही व अन्य विषय पर चर्चा होगी। मुझे विश्वास है कि यहां होने वाली चर्चा देश भर की विधानसभाओं में पहुंचेगी। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने इस कार्यक्रम के लिए आया प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संदेश पढ़कर सुनाया।

इस अवसर पर यूपी विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला काे प्रतीक चिह्रन भेंट किया। मंचस्थ राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह, राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, उप्र विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, विधान परिषद के सभापति मानवेन्द्र सिंह और नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय का शाल ओढ़ा कर प्रतीक चिह्रन भेंट कर स्वागत किया गया।

86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन काे प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की उपस्थिति में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। समापन सत्र को 21 जनवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संबोधित करेंगे।

यूपी में चाैथी बार हाे आयाेजन

विधानमंडलीय परंपरा के तहत यह सम्मेलन प्रत्येक वर्ष किसी न किसी राज्य में आयोजित होता है। पिछली बार इसका आयोजन कर्नाटक में हुआ था। उत्तर प्रदेश में यह चौथी बार आयोजित किया जा रहा है, इससे पूर्व वर्ष 2015 में उप्र को इसके आयोजन की जिम्मेदारी मिली थी। इस सम्मेलन के साथ ही आज से ही विधानसभा और विधान परिषद सचिवों का अलग सम्मेलन भी हाे रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / शिव सिंह