गुवाहाटी, 14 जनवरी (हि.स.)। असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर निर्मित बोगीबील रेल-सह-सड़क पुल आज केवल एक अभूतपूर्व इंजीनियरिंग उपलब्धि ही नहीं, बल्कि ऊपरी असम और पड़ोसी राज्य अरुणाचल प्रदेश के लिए जीवनरेखा के रूप में स्थापित हो चुका है। 4.94 किलोमीटर लंबा यह पुल भारत के सबसे लंबे नदी पुलों में शामिल है, जो डिब्रूगढ़ और धेमाजी को जोड़ते हुए उन समुदायों को परस्पर करीब लाता है, जो पीढ़ियों तक भौगोलिक दूरी के कारण अलग-थलग रहे।
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (पूसीरे) के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) कपिंजल शर्मा ने बुधवार को बताया कि दशकों तक ब्रह्मपुत्र ने असम के उपजाऊ मैदानों को जीवन दिया, लेकिन मानसून के दौरान यह नदी लोगों की आवाजाही और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच में बड़ी बाधा भी बनती रही। फेरी और मौसम पर निर्भर यात्रा लंबी और अनिश्चित हुआ करती थी, जिसे बोगीबील पुल ने पूरी तरह बदल दिया है। अब यह पुल सभी मौसमों में रेल और सड़क परिवहन की निर्बाध सुविधा उपलब्ध कराता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पुल को राष्ट्र को समर्पित किया जाना एक ऐतिहासिक क्षण था। यह केवल बुनियादी ढांचे का विकास नहीं, बल्कि सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण इस क्षेत्र में आधुनिक कनेक्टिविटी के नए युग की शुरुआत भी थी।
सीपीआरओ के अनुसार, पुल का प्रभाव लोगों के जीवन पर तत्काल और गहरा पड़ा है। ब्रह्मपुत्र के उत्तरी तट पर रहने वाले लोग अब स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और व्यापार के प्रमुख केंद्र डिब्रूगढ़ तक आसानी से पहुंच पा रहे हैं। इससे छात्रों, मरीजों, व्यापारियों और श्रमिकों के लिए यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आई है। छोटे व्यवसायों को नए बाजार मिले हैं, किसान अपने उत्पाद तेजी से पहुंचा पा रहे हैं और आवश्यक सेवाएं अब भौगोलिक सीमाओं में बंधी नहीं रहीं।
उन्होंने बताया कि आर्थिक दृष्टि से भी बोगीबील पुल ने असम और अरुणाचल प्रदेश में विकास की रफ्तार तेज की है। पर्यटन को बढ़ावा मिला है, आपूर्ति श्रृंखलाएं सुदृढ़ हुई हैं और औद्योगिक व वाणिज्यिक निवेश के नए अवसर खुले हैं। जो शहर पहले दूरस्थ माने जाते थे, वे अब आर्थिक मानचित्र पर अधिक प्रमुख बनते जा रहे हैं।
सीपीआरओ ने बताया कि रणनीतिक रूप से भी यह पुल अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पूर्वी सीमाओं पर आवागमन को सुदृढ़ करता है और राष्ट्रीय सुरक्षा व आपदा प्रबंधन क्षमताओं को मजबूती प्रदान करता है। इसका दोहरे उपयोग वाला डिज़ाइन, जो रेल और सड़क परिवहन दोनों के लिए है, कठिन मौसम में भी विश्वसनीय और लचीला परिवहन सुनिश्चित करता है।
उन्होंने कहा कि आज बोगीबील पुल स्टील और कंक्रीट से बनी एक संरचना से कहीं अधिक है। यह समुदायों, अवसरों और आकांक्षाओं को जोड़ने वाला सेतु बन चुका है, जो पूर्वोत्तर भारत को राष्ट्रीय मुख्यधारा के और करीब लाता है। असम के लोगों के लिए यह पुल नदी पर बना केवल एक मार्ग नहीं, बल्कि एक अधिक जुड़ा हुआ, आत्मविश्वासी और आशावान भविष्य का प्रतीक है।-----------
हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय



