युवा दिवस पर स्वामी विवेकानंद के पैतृक आवास के बाहर लगा दी अभिषेक बनर्जी की तस्वीर, विवाद तेज

कोलकाता, 12 जनवरी (हि. स.)। उत्तर कोलकाता के सिमला स्ट्रीट स्थित स्वामी विवेकानंद के पैतृक आवास के सामने तृणमूल कांग्रेस के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की तस्वीर वाला एक पोस्टर लगाए जाने को लेकर सोमवार को राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। पोस्टर पर ‘वेलकम, युवराज’ लिखा था, जिस पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कड़ा ऐतराज जताया।

भाजपा का आरोप है कि पोस्टर में केवल अभिषेक बनर्जी की तस्वीर है, जबकि उसमें स्वामी विवेकानंद का कोई चित्र नहीं लगाया गया। पार्टी का कहना है कि स्वामी विवेकानंद की 163वीं जयंती के दिन उनके पैतृक घर के सामने इस तरह का पोस्टर लगाना उनके अपमान के समान है।

इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ही असली युवराज हैं, उनके अलावा कोई युवराज नहीं हो सकता। मैं पिछले 33 वर्षों से यहां आ रहा हूं। हर साल स्वामीजी की जयंती पर बैनर-होर्डिंग लगवाता हूं, लेकिन उस पर अपना नाम तक नहीं लिखवाता। यहां मुख्यमंत्री के भतीजे को ‘युवराज’ कहने की जो कोशिश की गई है, वह अहंकार को दर्शाती है। मैंने सुना है कि यहां के प्रधान महाराज ने किसी और की तस्वीर लगाने से मना किया था, फिर भी उनकी बात नहीं मानी गई।

केंद्रीय मंत्री और प्रदेश भाजपा नेता सुकांत मजूमदार ने भी पोस्टर की आलोचना करते हुए कहा कि स्वामीजी कभी यहां विचरण किया करते थे, आज यहां कोयला और मवेशी तस्करी से जुड़े लोग घूमते हैं। बंगाल की जनता को इन्हें उखाड़ फेंकना होगा, नहीं तो इस धरती पर विवेकानंद जैसे महापुरुष फिर कभी नहीं होंगे।

इस बीच भाजपा ने स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि देने के लिए हेदुआ से सिमला स्ट्रीट तक ‘विवेक यात्रा’ भी निकाली। इसमें शुभेंदु अधिकारी, सुकांत मजूमदार, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य, युवा मोर्चा अध्यक्ष इंद्रनील खान और उत्तर कोलकाता जिला भाजपा अध्यक्ष तमोघ्न घोष समेत कई नेता शामिल हुए।

दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को खारिज किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि समर्थक अभिषेक बनर्जी को ‘युवराज’ के रूप में देखते हैं और यह पोस्टर किसी भी तरह से स्वामी विवेकानंद का अपमान करने के उद्देश्य से नहीं लगाया गया था।

तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने कहा कि केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने पहले स्वामी विवेकानंद को ‘कन्फ्यूज्ड लेफ्टिस्ट’ कहा था। ऐसे में हमें भाजपा से विवेकानंद पर कोई उपदेश सुनने की जरूरत नहीं है। विवेकानंद बंगालियों की भावना और आत्मसम्मान का प्रतीक हैं।

राज्य मंत्री शशि पांजा ने भी भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा नेताओं के हाथों में जो पोस्टर थे, उन पर स्वामी विवेकानंद के नाम से ‘गर्व से कहो कि मैं हिंदू हूं’ लिखा था। उन्होंने कहा कि इसके बजाय ‘गर्व से कहो कि मैं एक इंसान हूं’ जैसा संदेश भी दिया जा सकता था।

अभिषेक बनर्जी की तस्वीर पर सवाल उठाए जाने को लेकर शशि पांजा ने कहा कि लोकप्रिय नेताओं को उनके समर्थक अलग नजरिए से देखते हैं। अभिषेक को उनके समर्थक युवराज मानते हैं। इसमें किसी और का अपमान करने का सवाल ही नहीं है। यह अपने प्रिय नेता के प्रति लोगों का स्नेह है।

गौरतलब है कि सोमवार को स्वामी विवेकानंद की 163वीं जयंती मनाई गई। इस अवसर पर शुभेंदु अधिकारी और सुकांत मजूमदार सुबह सिमला स्ट्रीट पहुंचे थे।

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर