कृषि भूमि पर स्टांप ड्यूटी विवाद पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

जयपुर, 12 जनवरी (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने शहरी क्षेत्र में स्थित कृषि भूमि पर आवासीय दर से स्टांप ड्यूटी वसूलने से जुडे मामले में प्रमुख वित्त सचिव और आईजी स्टांप व कोटा उप-पंजीयक को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। एक्टिंग सीजे एसपी शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश दुर्गा शंकर की याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए।

याचिका में अधिवक्ता सिद्धार्थ बापना ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता की कोटा में कृषि भूमि है। जिसे राजस्व रिकॉर्ड में कृषि भूमि ही दर्शाया गया है और सरकार की ओर से इस पर कृषि दर से ही राजस्व वसूला जाता है। याचिकाकर्ता ने गत एक सितंबर को इसे बेचने के लिए इकरारनामा किया था। इसके तहत भूमि को कृषि भूमि मानकर कीमत तय की गई और एक नवंबर, 2025 तक पूरी रकम अदा होने पर रजिस्ट्री कराने का निर्णय लिया गया। याचिका में कहा गया कि इस बीच 1 अक्टूबर को राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर कृषि भूमि की सीमा एक हजार वर्ग मीटर से बढ़ाकर दो हजार वर्ग मीटर कर दी। वहीं इसे स्टांप ड्यूटी के लिए आवासीय भूमि के समान मान लिया। याचिका में कहा गया कि यह फैसला संविधान के प्रावधानों के खिलाफ है। वहीं संबंधित भूमि कृषि भूमि ही है और उसका न तो रूपान्तरण हुआ है और ना ही भू उपयोग बदला गया है। इसके बावजूद उसे आवासीय मानकर अतिरिक्त स्टांप ड्यूटी वसूलना गलत है। इसके अलावा राज्य सरकार ने यह अधिसूचना जारी करने से पहले इस पर आपत्तियां नहीं मानी। ऐसे में पूर्व में किए गए समझौते इस अधिसूचना से प्रभावित हो रहे हैं। याचिका में गुहार की गई है कि इस अधिसूचना के संबंधित प्रावधान को रद्द किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / पारीक