आरजी कर मेडिकल कॉलेज में महिला की मौत, परिजनों ने किया अस्पताल में हंगामा
- Admin Admin
- Jan 14, 2026
कोलकाता, 14 जनवरी (हि. स.)। आर. जी. कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक बार फिर गंभीर चिकित्सा लापरवाही के आरोप सामने आए हैं। इलाज के दौरान एक बुज़ुर्ग महिला की मौत के बाद मंगलवार रात अस्पताल परिसर में भारी हंगामा और विरोध प्रदर्शन हुआ। मृत महिला की पहचान जैबुन निशा (65) के रूप में हुई है, जो उत्तर कोलकाता के बेलगछिया की निवासी थीं।
परिजनों का आरोप है कि सांस की समस्या के चलते उन्हें मंगलवार शाम करीब आठ बजे आर. जी. कर अस्पताल के ट्रॉमा केयर यूनिट में भर्ती कराया गया था, लेकिन लंबे समय तक उन्हें इलाज नहीं मिला।
परिजनों का कहना है कि उस समय ट्रॉमा यूनिट में केवल एक डॉक्टर मौजूद था, जिसने मरीज को देखने से इनकार कर दिया। आरोप है कि महिला की हालत बेहद नाजुक होने के बावजूद करीब 40 से 45 मिनट तक कोई डॉक्टर इलाज के लिए आगे नहीं आया। इस दौरान मरीज की हालत लगातार बिगड़ती चली गई।
काफी देर बाद पांच-छह जूनियर डॉक्टर मौके पर पहुंचे और इलाज शुरू किया। तमाम कोशिशों के बावजूद बुज़ुर्ग महिला को बचाया नहीं जा सका और उसकी मौत हो गई। घटना के बाद मृतका के परिजन और स्थानीय लोग ट्रॉमा केयर यूनिट के सामने धरने पर बैठ गए और अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था व स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल उठाए।
मृतका के एक परिजन शमीम अख्तर ने स्थानीय मीडिया से कहा कि आर. जी. कर अस्पताल की हालत बेहद खराब है। अगर किसी की हालत गंभीर हो तो उसे यहां लाने की सलाह नहीं दी जा सकती। डॉक्टरों को पुलिस सुरक्षा मिल रही है, लेकिन हमें कोई सेवा नहीं मिल रही। पूरे अस्पताल में अराजकता का माहौल है।
स्थिति बिगड़ते देख अस्पताल में तैनात पुलिस बल के साथ-साथ सीआरपीएफ (केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल) के जवान भी मौके पर पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाया और बुधवार सुबह तक स्थिति पर काबू पाया जा सका।
मृतका के परिवार ने इस पूरे मामले में चिकित्सा लापरवाही की निष्पक्ष जांच की मांग की है। हालांकि, इस घटना को लेकर अब तक अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
गौरतलब है कि इससे पहले नौ अगस्त 2024 को आर. जी. कर मेडिकल कॉलेज में एक महिला पीजी ट्रेनी डॉक्टर का शव सेमिनार हॉल से बरामद होने की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। उस मामले में दोषी संजय रॉय को ट्रायल कोर्ट द्वारा उम्रकैद की सज़ा सुनाई जा चुकी है, लेकिन घटना के एक साल बाद भी सीबीआई कथित ‘बड़ी साजिश’ की जांच पूरी नहीं कर सकी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता



