हिमाचल में 21–22 जनवरी को हर पंचायत में एंटी चिट्टा ग्राम सभा, तस्करों की संपत्तियां होंगी ध्वस्त

शिमला, 13 जनवरी (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में नशे के खिलाफ अभियान को और सख्त करते हुए प्रदेश सरकार ने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में 21 और 22 जनवरी को एंटी चिट्टा ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा। साथ ही चिट्टा तस्करों की संपत्तियां को ध्वस्त भी किया जाएगा।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि इन ग्राम सभाओं में चिट्टा से जुड़ी स्थिति की समीक्षा की जाएगी और नशे की लत में फंसे स्थानीय युवाओं की पहचान कर उनके पुनर्वास पर भी चर्चा और कार्रवाई की जाएगी।

शिमला में मंगलवार को वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एंटी चिट्टा ग्राम सभाओं में अन्य विभागों के अधिकारियों को पर्यवेक्षक के रूप में तैनात किया जाएगा ताकि पंचायत स्तर पर नशे से जुड़ी हर जानकारी का सही आकलन हो सके। ग्राम सभाओं के दौरान चिट्टा से संबंधित पंचायत की पूरी मैपिंग की जाएगी, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि नशे की समस्या कहां और किस स्तर तक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए पहले से ही प्रदेश भर में अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में अब प्रीमियर लीग की तर्ज पर एंटी चिट्टा अवेयरनेस स्पोर्ट्स टूर्नामेंट आयोजित किए जाएंगे। इन टूर्नामेंटों में कबड्डी, क्रिकेट और वॉलीबॉल की प्रतियोगिताएं होंगी, जो ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर आयोजित की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि विजेता टीमों को पुरस्कार राशि भी प्रदान की जाएगी, ताकि युवाओं को खेलों के माध्यम से नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया जा सके।

सुक्खू ने स्पष्ट किया कि चिट्टा तस्करी और इसकी सप्लाई चेन को तोड़ने के लिए सरकार बहुआयामी रणनीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि चिट्टा तस्करों द्वारा बनाई गई संपत्तियों की पहचान कर ली गई है और इन संपत्तियों को ध्वस्त किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य नशे के कारोबार में शामिल लोगों को सख्त संदेश देना है कि ऐसी गतिविधियों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिए कि चिट्टे और अन्य नशों के दुष्प्रभावों को लेकर विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए स्कूलों की पाठ्य पुस्तकों में एक अध्याय शामिल किया जाए। इसके साथ ही पंचायत स्तर पर गठित नशा निवारण समितियों में ग्राम पंचायत प्रधान और पंचायत समिति सदस्यों को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल करने के निर्देश भी दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने नशे के खिलाफ इस अभियान में एफपीओ और महिला मंडलों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा