जौनपुर ,11 जनवरी (हि.स.)। यूपी के जौनपुर में प्रतिबंधित चाइनीज/नायलॉन/सिंथेटिक मांझा, प्लास्टिक तात धागा और सीसा लेपित धागे की बिक्री, भंडारण तथा उपयोग के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम जौनपुर ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने तकनीकी आधार पर इस आवेदन को अस्वीकार किया।
न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम इस आवेदन की सुनवाई के लिए सक्षम नहीं है। इसका कारण यह है कि याचिका में राज्यपाल और जिला मजिस्ट्रेट, जौनपुर को भी पक्षकार बनाया गया था। कोर्ट ने आवेदक को उचित एवं सक्षम न्यायालय या फोरम में याचिका प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
यह आवेदन जफराबाद थाना क्षेत्र के ग्राम कोड्डा निवासी आशीष शुक्ल द्वारा दायर किया गया था। याचिका का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, मानव जीवन की सुरक्षा और पशु-पक्षियों की रक्षा करना था।
आवेदक ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्णयों, सरकारी ज्ञापनों, समाचार कटिंग्स और स्थानीय सर्वेक्षण के आधार पर साक्ष्य प्रस्तुत किए थे। यह आवेदन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) और अनुच्छेद 51क (घ) (पर्यावरण संरक्षण का मौलिक कर्तव्य) से प्रेरित था।आशीष शुक्ल की कानूनी पैरवी कर रहे अधिवक्ता विकास तिवारी ने रविवार को बताया कि कोर्ट का यह निर्णय केवल तकनीकी आधार पर है। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधित मांझे से होने वाली मौतें और दुर्घटनाएं अभी भी जारी हैं। तिवारी ने घोषणा की कि वे जल्द ही इस मामले को उच्च न्यायालय या किसी अन्य सक्षम फोरम में फिर से प्रस्तुत करेंगे ताकि इस घातक मांझे पर पूर्ण और प्रभावी रोक लगाई जा सके।
जौनपुर में हाल ही में चाइनीज मांझे से कई गंभीर घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें एक स्कूल शिक्षक की मौत भी शामिल है, जिनकी गर्दन मांझे से कट गई थी। पुलिस से कई बार मांग की जा चुकी है कि मांझा बेचने या उपयोग करने वालों के खिलाफ हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए।
राष्ट्रीय स्तर पर, एनजीटी ने वर्ष 2017 में ही सिंथेटिक/नायलॉन मांझे पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि, जमीनी स्तर पर इसके अमल में कमी के कारण हर साल मकर संक्रांति जैसे अवसरों पर दुर्घटनाओं में वृद्धि देखी जाती है।
हिन्दुस्थान समाचार / विश्व प्रकाश श्रीवास्तव



