शिमला में मनाया सेना दिवस, राज्यपाल ने सेना के साहस और बलिदान को किया नमन

शिमला, 17 जनवरी (हि.स.)। आर्मी ट्रेनिंग कमांड (आरट्रैक) शिमला में 78वें सेना दिवस के अवसर पर शनिवार को भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने भारतीय सेना को अद्वितीय बलिदान, अदम्य साहस और अटूट संकल्प का प्रतीक बताया।

राज्यपाल ने कहा कि आज के समय में सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां लगातार बदल रही हैं। साइबर युद्ध, सूचना युद्ध और नई तकनीकों से जुड़े खतरे बढ़ रहे हैं। ऐसे में आर्मी ट्रेनिंग कमांड की भूमिका और भी अहम हो जाती है। उन्होंने कहा कि यहां दिया जाने वाला नेतृत्व और प्रशिक्षण भारतीय सेना को न केवल मजबूत बनाता है, बल्कि उसे नैतिक और मानवीय मूल्यों से भी जोड़ता है।

उन्होंने कहा कि सेना दिवस केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं है बल्कि यह उन सैनिकों के बलिदान, साहस और समर्पण को याद करने का दिन है, जिन्होंने देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। राज्यपाल ने कहा कि आरट्रैक भारतीय सेना के प्रशिक्षण और सिद्धांतगत उत्कृष्टता का प्रमुख केंद्र है, जहां भविष्य के युद्धों की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए यथार्थपरक और तकनीक आधारित प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

राज्यपाल ने हिमाचल प्रदेश और भारतीय सेना के गहरे और भावनात्मक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रदेश वीरभूमि है। यहां के लगभग हर गांव में सैन्य सेवा की गौरवशाली परंपरा देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि हिमाचल के सपूतों ने देश की रक्षा में हमेशा आगे बढ़कर योगदान दिया है।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने हाल के वर्षों में रक्षा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रक्षा मंत्रालय का बजट लगभग 6 लाख 81 हजार 210 करोड़ रुपये रखा गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 9.5 प्रतिशत अधिक है। यह बढ़ा हुआ बजट देश की सुरक्षा और रणनीतिक मजबूती को दर्शाता है।

राज्यपाल ने अग्निवीर योजना का भी उल्लेख किया और कहा कि इससे सेना में युवा ऊर्जा का समावेश हुआ है। इस योजना के लिए बजट बढ़ाकर 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक किया गया है, जिससे सेना अधिक चुस्त बनेगी और युवाओं को अनुशासन व राष्ट्रसेवा का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि वन रैंक वन पेंशन के तहत जुलाई 2024 से लागू संशोधनों से पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिली है। साथ ही एक्स-सर्विसमैन कॉन्ट्रिब्यूटरी हेल्थ स्कीम के लिए 8,317 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे 55 लाख से अधिक लोग स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ ले रहे हैं।

राज्यपाल ने सैनिकों के परिवारों के त्याग को भी नमन किया और कहा कि उनके बिना सैनिकों का कर्तव्य निभाना संभव नहीं होता। उन्होंने देश के लिए बलिदान देने वाले वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, आर्मी ट्रेनिंग कमांड जनरल देवेन्द्र शर्मा ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया है कि भारतीय सेना किसी भी चुनौती का तेज और संतुलित जवाब देने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि आर्मी ट्रेनिंग कमांड का लक्ष्य सेना को 21वीं सदी के युद्धों के लिए तैयार करना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा