भाजपा ने अखिल गोगोई पर लगाया अवसरवादी राजनीति का आरोप

गुवाहाटी, 11 जनवरी (हि.स.) । भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की असम इकाई ने रविवार को शिवसागर से विधायक अखिल गोगोई पर आगामी विधानसभा चुनावों से पहले अपनी राजनीतिक रणनीति में अवसरवादी बदलाव करने का आरोप लगाया। भाजपा प्रदेश मुख्यालय अटल बिहारी वाजपेयी भवन में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए रविवार काे पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. देवजीत महंत ने कहा कि गोगोई अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

डॉ. महंत ने आरोप लगाया कि शिवसागर से निर्वाचित अखिल गोगोई अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग राजनीतिक छवि प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऊपरी असम में गोगोई स्वयं को ‘जातीयतावादी’ नेता के रूप में प्रस्तुत करते हैं, जबकि निचले असम में अल्पसंख्यक समुदायों के साथ अधिक निकटता दिखाते हैं और कई बार वामपंथी रुख भी अपनाते हैं। भाजपा प्रवक्ता ने इस रणनीति को राजनीतिक अवसरवाद का उदाहरण बताया।

उन्होंने दावा किया कि गोगोई ने चेंगा, श्रीजंग्राम और मांडिया जैसे अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं, जो आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर की जा रही हैं। महंत के अनुसार, इस तरह की राजनीतिक सक्रियता कुछ ऐसे व्यक्तियों के सहयोग से की जा रही है, जो पहले अल्पसंख्यक संस्कृति के संरक्षण से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे हैं।

अतिक्रमण विरोधी कार्रवाइयों का उल्लेख करते हुए डॉ. महंत ने आरोप लगाया कि अखिल गोगोई वर्ष 2015 से काजीरंगा क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का लगातार विरोध करते रहे हैं और वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे बेदखली अभियानों की भी आलोचना कर रहे हैं। भाजपा का कहना है कि इस तरह का रुख स्वदेशी समुदायों के हितों के विरुद्ध है।

डॉ. महंत ने यह भी आरोप लगाया कि बेदखली अभियानों से जुड़े विरोध प्रदर्शनों में गोगोई की भूमिका से प्रशासनिक कार्यों में बाधा और तनाव की स्थिति उत्पन्न हुई है। उन्होंने यह दावा भी किया कि गोगोई भविष्य में शिवसागर के अलावा किसी अन्य विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की तैयारी कर सकते हैं। संवाददाता सम्मेलन में वरिष्ठ भाजपा प्रवक्ता ब्रजेन महंत, पार्टी प्रवक्ता प्रांजल कलिता तथा मीडिया पैनलिस्ट मून तालुकदार भी उपस्थित रहे।

भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने अल्प अवधि में भारी कर्ज लिया है, जबकि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार ने निर्धारित सीमा से अधिक ऋण लेकर राज्य को वित्तीय संकट में डाल दिया है। डॉ. महंत ने असम कांग्रेस को चुनौती दी कि वह अपने चुनावी घोषणापत्र में स्पष्ट करे कि सत्ता में आने पर वह कर्ज लेने से परहेज करेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश