नई दिल्ली, 17 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली के कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि 6 जनवरी को दिल्ली विधानसभा के सत्र के दौरान गुरु तेग बहादुर जी के सम्मान में चल रही चर्चा (संविधान के अनुच्छेद 270 के तहत) के दौरान नेता प्रतिपक्ष आतिशी द्वारा कहे गए आपत्तिजनक शब्दों को लेकर अब सच्चाई पूरी तरह देश के सामने आ चुकी है।
सिरसा ने शनिवार को दिल्ली सचिवालय में प्रेस कांफ्रेंस करते हुए कहा कि दिल्ली फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की रिपोर्ट ने स्पष्ट रूप से यह प्रमाणित कर दिया है कि विधानसभा का वीडियो पूरी तरह असली है, उसमें किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की गई, और उसमें वही शब्द बोले गए हैं जो विधानसभा अध्यक्ष द्वारा जारी आधिकारिक अनुलग्नक सहित में दर्ज हैं। उन्होने कहा कि आतिशी आज तक सामने नहीं आईं क्योंकि उनके पास इस पाप का कोई जवाब नहीं है।
सिरसा ने कहा कि 6 तारीख को जब गुरु तेग बहादुर जी के सम्मान में चर्चा हो रही थी, उस समय आतिशी ने शोर मचाया, और जब उन्हें रोका गया तो उन्होंने ऐसे अपशब्द बोले जो न सिर्फ सदन की मर्यादा के खिलाफ थे बल्कि सिख समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाले थे। आज तक वह सामने नहीं आईं, क्योंकि जो पाप उन्होंने किया है, उसका कोई जवाब उनके पास है ही नहीं। उन्होंने कहा कि विडंबना यह है कि उसी दिन प्रदूषण पर चर्चा भी हुई, समाप्त भी हुई और अखबारों में भी छपी, लेकिन आतिशी तब से अब तक गायब हैं।
सिरसा ने आरोप लगाया कि आतिशी को बचाने के लिए आम आदमी पार्टी (आआपा) और पंजाब सरकार ने मिलकर संस्थागत दुरुपयोग किया। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस ने एक ही दिन में एफआईआर दर्ज कर सीएफएसएल रिपोर्ट मंगवाई, जिसमें एक सीनियर कांस्टेबल ने यह दावा किया कि उसने जेमिनी एआई के जरिए वीडियो की जांच की—जो अपने आप में रिपोर्ट की गंभीरता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है। जेमिनी एआई से वीडियो चेक कर एफएसएल की रिपोर्ट तैयार की गई। क्या ऐसे गंभीर मामले में एआई टूल से जांच की जा सकती है?
सिरसा ने कहा कि यह और भी चौंकाने वाला है कि अदालत में आतिशी खुद नहीं, बल्कि पंजाब सरकार गई और यह मांग की कि वीडियो को मीडिया से हटाया जाए, क्योंकि उनकी ओर से दी गई तथाकथित एफएसएल रिपोर्ट सही है। यह साफ है कि आतिशी की जगह पूरी आम आदमी पार्टी और पंजाब सरकार उनकी लड़ाई लड़ रही है।
सिरसा ने कहा कि अब जब एफएसएल रिपोर्ट सार्वजनिक हो गई है, तो आआपा के नेता यह सवाल उठा रहे हैं कि विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने रिपोर्ट क्यों जारी की। असल में वे नहीं चाहते थे कि फॉरेंसिक रिपोर्ट कभी सामने आए। अब सच्चाई सामने आ गई है तो छटपटा रहे हैं।
सिरसा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आतिशी मार्लेना को सामने आकर स्पष्टीकरण देना चाहिए, अरविंद केजरीवाल को देश और सिख समाज से माफी मांगनी चाहिए और भगवंत मान को भी सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए क्योंकि पंजाब पुलिस और सरकार ने इस मामले में झूठ को सच बनाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि यह कोई राजनीतिक लड़ाई नहीं है। गुरु साहिब की धरती पंजाब में धर्म को पुलिस और सत्ता के दम पर डराया नहीं जा सकता।
सिरसा ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और समस्त पंथिक संगठनों से अपील की कि वे इस विषय पर संज्ञान लें और अपनी बात सबके सामने रखें।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव



