दाड़ीभीट कांड में एनआईए जांच को बरकरार रखने के कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले का एबीवीपी ने किया स्वागत
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- Jan 06, 2026
कोलकाता, 06 जनवरी (हि.स.)।अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने 2018 के दाड़ीभीट कांड में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की जांच को बरकरार रखने वाले कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर एबीवीपी ने इसे न्याय की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम बताया है।
दाड़ीभीट की घटना में पुलिस फायरिंग के दौरान एबीवीपी कार्यकर्ता राजेश सरकार और तपस बर्मन की मौत हो गई थी। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। एबीवीपी का कहना है कि शुरुआत से ही संगठन इस मामले में निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग करता रहा है, क्योंकि राज्य की जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।
साल 2023 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच एनआईए को सौंपने का आदेश दिया था, जिसे चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने डिवीजन बेंच में अपील दायर की थी। लगभग सात साल बाद, हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए एनआईए जांच को बरकरार रखा है।
एबीवीपी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार लगातार इस मामले की जांच को कमजोर करने और भटकाने का प्रयास करती रही है। संगठन के अनुसार, हाईकोर्ट का यह फैसला इस बात की पुष्टि करता है कि राजनीतिक दबाव के चलते न्याय प्रक्रिया को बाधित नहीं किया जा सकता, विशेषकर तब जब मामला युवाओं की मौत से जुड़ा हो।
एबीवीपी ने दोहराया कि वह राजेश सरकार और तापस बर्मन के परिवारों के साथ खड़ी है और दोषियों को सजा दिलाने तक अपना संघर्ष जारी रखेगी, चाहे उनका राजनीतिक रसूख कुछ भी क्यों न हो।
एबीवीपी के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा,
“हाईकोर्ट का यह फैसला स्पष्ट करता है कि इस मामले को जिस तरह से संभाला गया, उस पर न्यायपालिका को गंभीर चिंता है। यह राज्य सरकार की विफलता को भी उजागर करता है। हम राज्य सरकार से अपील करते हैं कि वह एनआईए जांच में सहयोग करे और दोषियों को बचाने के बजाय कानून के शासन का सम्मान करे। हमें विश्वास है कि केवल एक निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच से ही पुलिस फायरिंग की सच्चाई सामने आ सकती है।”
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय



