कोकराझार में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
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- Jan 08, 2026

कोकराझार (असम), 08 जनवरी (हि.स.)। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (आरपीडब्ल्यूडी), 2016 पर एक जागरूकता-सह-संवेदनशीलता कार्यक्रम आज कोकराझार के जिला आयुक्त सम्मेलन कक्ष में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन असम राज्य के दिव्यांगजन आयुक्त कार्यालय द्वारा कोकराझार जिला आयुक्त कार्यालय के सहयोग से किया गया, जिसका उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों, पात्रताओं तथा कल्याणकारी योजनाओं के संबंध में अधिकारियों में जागरूकता बढ़ाना था।
कार्यक्रम में असम की दिव्यांगजन आयुक्त सुषमा हजारिका, कोकराझार के जिला आयुक्त पंकज चक्रवर्ती सहित अतिरिक्त जिला आयुक्त, विभिन्न विभागों के प्रमुख, सीडीपीओ तथा अन्य जिला स्तरीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला आयुक्त पंकज चक्रवर्ती ने कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों को पहचानना, उनका सम्मान करना और उन्हें सशक्त बनाना न केवल सरकारी अधिकारियों बल्कि, प्रत्येक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने दिव्यांगता से जुड़े सामाजिक वर्जनाओं को समाप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने दिव्यांगजनों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के महत्व को रेखांकित करते हुए लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु उठाए गए कदमों, जैसे चुनावों के दौरान होम वोटिंग की सुविधा, के बारे में भी जानकारी दी। जिला आयुक्त ने कार्यक्रम में उपस्थित होकर मार्गदर्शन देने के लिए दिव्यांगजन आयुक्त की सराहना की।
कार्यक्रम में संसाधन व्यक्ति के रूप में उपस्थित भारत सरकार के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के राजीव भारद्वाज ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के विभिन्न प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह अधिनियम 28 दिसंबर, 2016 को अधिनियमित हुआ और 19 अप्रैल, 2017 से लागू किया गया। अधिनियम में दिव्यांगता को एक विकसित एवं गतिशील अवधारणा के रूप में परिभाषित किया गया है तथा मान्यता प्राप्त दिव्यांगताओं की संख्या 7 से बढ़ाकर 21 कर दी गई है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार और असम सरकार द्वारा दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा एवं समान अवसर सुनिश्चित करने हेतु अनेक कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने सभी संबंधित विभागों से सरकारी कार्यालयों में दिव्यांग-अनुकूल सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की अपील की तथा दिव्यांग बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से आग्रह किया कि दिव्यांग प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया में समयबद्ध कदम उठाए जाएं, ताकि दिव्यांग व्यक्ति सरकार द्वारा प्रदान किए जाने वाले यूनिक डिसएबिलिटी आइडेंटिटी (यूडीआईडी) कार्ड के माध्यम से विभिन्न लाभ प्राप्त कर सकें।
हिन्दुस्थान समाचार / किशोर मिश्रा



