हिमाचल का प्रशासन दिशाहीन और बेलगाम हुआ: संजीव कटवाल
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- Jan 14, 2026
शिमला, 14 जनवरी (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री संजीव कटवाल ने लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह की विवादित सोशल मीडिया पोस्ट और उससे जुड़े पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने बुधवार को एक बयान में कहा कि कांग्रेस के कार्यकाल में हिमाचल प्रदेश का प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह दिशाहीन और बेलगाम हो चुका है।
संजीव कटवाल ने आरोप लगाया कि सत्ता के संरक्षण में कुछ अधिकारी खुद को जवाबदेही से ऊपर समझने लगे हैं और भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों पर सरकार जानबूझकर आंखें मूंदे बैठी है।
संजीव कटवाल ने स्पष्ट किया कि भाजपा ने कभी भी ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों का विरोध नहीं किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी हमेशा उन अधिकारियों के साथ खड़ी रही है, जो प्रदेश के हित में ईमानदारी से काम करते हैं। लेकिन साथ ही भाजपा ने हर दौर में भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों, वित्तीय अनियमितताओं, कमीशनखोरी और जनता के धन की लूट से जुड़े मामलों को मजबूती से उठाया है। चाहे मामला केंद्र से मिलने वाली राशि के दुरुपयोग का हो या विकास कार्यों में भ्रष्टाचार का, भाजपा ने हर मंच पर सरकार से जवाब मांगा है।
भाजपा प्रदेश महामंत्री ने कहा कि असली सवाल यह नहीं है कि कोई अधिकारी कहां से आया है बल्कि यह है कि वह अपना काम ईमानदारी से कर रहा है या नहीं। यदि कोई अधिकारी या सत्ता से जुड़ा व्यक्ति भ्रष्टाचार में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार में मंत्री और अधिकारी गैर-जिम्मेदाराना बयान दे रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री की ओर से न तो कोई स्पष्ट रुख सामने आ रहा है और न ही किसी तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई हो रही है। यह चुप्पी या तो भ्रष्टाचार पर मौन सहमति को दर्शाती है या फिर प्रशासन पर सरकार की कमजोर पकड़ को, जो दोनों ही स्थितियां प्रदेश के लिए गंभीर और खतरनाक हैं।
संजीव कटवाल ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को संविधान और सेवा नियमों के तहत निष्पक्ष होकर काम करना चाहिए, यही लोकतंत्र की बुनियाद है। राजनीतिक संरक्षण के भरोसे मर्यादाहीन बयानबाजी और मनमानी को भाजपा बर्दाश्त नहीं करेगी।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि पूरे मामले पर तुरंत सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट की जाए, विवादित बयानों पर जवाबदेही तय की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि हिमाचल प्रदेश में प्रशासनिक अनुशासन, पारदर्शिता और सौहार्द किसी भी कीमत पर कमजोर न होने पाए। ल
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा



