चौरी-चौरा के ब्रह्मपुर में स्थापित होगी विश्व की पहली महाराज यदु की प्रतिमा, बनेगा पहला श्री यदुधाम पीठ

चौरी-चौरा के ब्रह्मपुर में स्थापित होगी विश्व की पहली महाराज यदु की प्रतिमा, बनेगा पहला श्री यदुधाम पीठ*चौरी-चौरा के ब्रह्मपुर में स्थापित होगी विश्व की पहली महाराज यदु की प्रतिमा, बनेगा पहला श्री यदुधाम पीठ*चौरी-चौरा के ब्रह्मपुर में स्थापित होगी विश्व की पहली महाराज यदु की प्रतिमा, बनेगा पहला श्री यदुधाम पीठ*

गोरखपुर, 15 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद गोरखपुर से आज एक ऐसी सांस्कृतिक क्रांति का शंखनाद हुआ है, जो विश्व भर के करोड़ों यदुवंशियों के गौरव को पुनर्जीवित करने जा रही है। स्थानीय प्रेस क्लब में आयोजित एक भव्य प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए ओबीसी पार्टी (वन भारत सिटीजन पार्टी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं श्रीकृष्ण धर्म ट्रस्ट के प्रमुख काली शंकर यदुवंशी ने ऐतिहासिक घोषणा करते हुए बताया कि चौरी-चौरा के ब्रह्मपुर में “श्री यदु धाम पीठ” नाम से भारतवर्ष में यदुवंश का पहला प्रेरणा एवं शक्ति केंद्र स्थापित किया जा रहा है, जहाँ महाराज यदु की विश्व की पहली प्रतिमा स्थापित की जाएगी। साथ ही श्री राधा–कृष्ण तथा सहस्त्रबाहु अर्जुन (कार्तवीर्य अर्जुन) की भव्य एवं दिव्य प्रतिमाओं की स्थापना भी प्रस्तावित है, जो यदु वंश की वीरता और धर्मरक्षण की परंपरा का प्रतीक मानी जाती है।

प्रेस वार्ता में यह भी स्पष्ट किया गया कि यह पीठ केवल यादव समाज ही नहीं, बल्कि जायसवाल (हैहयवंशी) समाज की साझा वैदिक‑ऐतिहासिक विरासत का संगम होगा। यहाँ महाराज यदु के साथ‑साथ श्री राधा‑कृष्ण एवं वीरता, शौर्य और राज्य-कौशल के प्रतीक सहस्त्रबाहु अर्जुन (कार्तवीर्य अर्जुन) की भी भव्य प्रतिमाएँ स्थापित की जाएँगी। यह स्थल यदुवंशी, हैहयवंशी और संबंधित वंशों के लिए अध्ययन, साधना, प्रेरणा और संगठन का एक जीवंत केंद्र बनेगा।

काली शंकर यदुवंशी ने अपने संबोधन में उन राजनीतिक दलों और नेताओं पर भी तीखा प्रहार किया जिन्होंने दशकों तक यादवों और पिछड़े वर्गों के नाम पर सत्ता का सुख भोगा, लेकिन समाज के आदि पूर्वजों को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर सम्मान दिलाने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब समाज केवल किसी का वोट बैंक बनकर नहीं रहेगा, बल्कि अपना वैचारिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक नेतृत्व स्वयं तय करने वाला स्वाभिमानी समाज बनकर उभरेगा।

काली शंकर यदुवंशी ने कहा कि यदुवंशी होना किसी दल का अनुयायी होना नहीं, बल्कि समता, साहस और सत्य का प्रतिनिधि होना है। यही असली यदुवंशीता है। यदुवंश किसी पार्टी की जायदाद नहीं है यह एक जीवंत परंपरा है

राजनीतिक विचारधाराएँ अस्थायी होती हैं, लेकिन यदुवंश की सामाजिक चेतना शाश्वत है। किसी एक पार्टी या विचारधारा से जुड़ना व्यक्ति का अधिकार है, लेकिन पूरे वंश को उसी तराजू में तौलना सामाजिक अन्याय है।

काली शंकर यदुवंशी ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि जिस यदुकुल में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने अवतार लिया, उस वंश के संस्थापक और आदि पुरुष महाराज यदु को इतिहास के पन्नों में वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वे वास्तविक रूप से पात्र थे। उन्होंने एक महत्वपूर्ण तथ्य साझा करते हुए बताया कि वर्तमान समय में पूरे विश्व में महाराज यदु की न तो कोई प्रतिमा है और न ही यदुवंशियो का अपना कोई स्वतंत्र पीठ स्थापित है। इसी ऐतिहासिक उपेक्षा और अन्याय को समाप्त करने के लिए चौरी-चौरा के ब्रह्मपुर में विश्व की पहली 11 फीट ऊंची स्वर्णमयी महाराज यदु की प्रतिमा स्थापित की जा रही है। यह श्री यदुधाम पीठ विश्व के करोड़ों यदुवंशियों के लिए अपनी तरह का पहला और एकमात्र आध्यात्मिक‑सांस्कृतिक शक्ति केंद्र होगा।

इस अभियान की पृष्ठभूमि साझा करते हुए काली शंकर यदुवंशी ने बताया कि इस कार्य की प्रेरणा उन्हें प्रातः 3 बजे आए एक अलौकिक स्वप्न से मिली, जिसमें स्वयं महाराज यदु ने प्रकट होकर समाज की सांस्कृतिक विस्मृति और उपेक्षा पर दुःख व्यक्त किया। यदुवंशी ने इस स्वप्न को अपने पूर्वजों का 'दैवीय आदेश' मानते हुए इस महाअभियान का संकल्प लिया और इसे जीवन का एक प्रमुख लक्ष्य बताया।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय