एक अच्छा शिक्षार्थी बनना व अपने गुरुजनों का गौरव बनना एक उत्कृष्ट लक्ष्य : डॉ प्रशांत

कोरबा, 15 जनवरी (हि. स.)। एक प्रशिक्षार्थी की जिम्मेदारी है कि वह पूरी निष्ठा व समर्पण के साथ सीखे और अपना पाठ्यक्रम पूरा करे। इससे आप न केवल एक अच्छे शिक्षक बन सकते हैं, बल्कि एक ऐसी विरासत भी छोड़ सकते हैं जो आपके महाविद्यालय को गौरवान्वित करे। पहले अच्छा प्रशिक्षार्थी और फिर एक अच्छा शिक्षक बनना, गुरुजनों का नाम रोशन करना एक उत्कृष्ट व प्रेरणादायक लक्ष्य है। यह सबक गांठ बांध लें, तो आप स्वयं के साथ भविष्य में अपने विद्यार्थियों को काबिल बनाने का दायित्व कुशलता से निभा सकते हैं।

यह बातें गुरुवार को कमला नेहरू महाविद्यालय कोरबा के डीएलएड प्रथम वर्ष की दस दिवसीय संपर्क कक्षा सह प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह में मुख्य अतिथि रहे प्राचार्य डॉ प्रशांत बोपापुरकर ने प्रशिक्षार्थियों को मार्गदर्शन प्रदान करते हुए कहीं। डीएलएड प्रभारी एवं शिक्षा संकाय की विभागाध्यक्ष डॉ भारती कुलदीप ने भी प्रशिक्षार्थियों को मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने कहा कि सदैव अपने विद्यार्थियों के साथ समानता व सम्मान का व्यवहार करें। उन्हें रचनात्मक विचारक और जीवन भर सीखने वाले बनने में मदद करें। उन्होंने बताया कि 5 से 15 जनवरी तक यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इस कार्यक्रम में प्रमुख रूप से डॉ भारती कुलदीप, अंजू खेस, डॉ रश्मि शुक्ला, कुणाल दासगुप्ता, राकेश गौतम, नितेश यादव, शंकरलाल यादव उपस्थित रहे। प्रशिक्षार्थियों ने अपने गुरुजनों को श्रीफल एवं पुष्पमाला भेंटकर स्वागत अभिनंदन किया। कार्यक्रम में अनेक आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गई। सरस्वती वंदना महिमा व उर्वशी, स्वागत गीत उर्वशी व संध्या ने प्रस्तुत किया। विनीता, अनिल प्रधान एवं चित्रकांता ने भी गीत प्रस्तुत किए। उर्वशी श्रीवास, विकास राठौर व रूपेश कुमार ने अपने अनुभव साझा किए। वर्षा पैकरा व देव राठिया ने आभार प्रदर्शन किया। मंच संचालन की जिम्मेदारी निधि सोनी ने निभाई।

हिन्दुस्थान समाचार / हरीश तिवारी