जिले के बाहर विवाह करने पर स्थानीय कोटा भर्ती के लिए उम्मीदवार अयोग्य घोषित: उच्च न्यायालय

श्रीनगर, 14 जनवरी (हि.स.)। जम्मू- कश्मीर उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि जो उम्मीदवार अपने गृह जिले के बाहर विवाह करती है वह जिला-विशिष्ट भर्ती के लिए तब तक पात्रता का दावा नहीं कर सकती जब तक कि वह विश्वसनीय दस्तावेजी साक्ष्य के माध्यम से स्थानीय निवास साबित न कर दे। न्यायमूर्ति जावेद इकबाल वानी ने सुषमा देवी द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया

जिन्होंने अपने अनंतिम चयन को रद्द किए जाने को चुनौती दी थी और संबंधित जिले के स्थानीय उम्मीदवारों के लिए आरक्षित पद पर नियुक्ति की मांग की थी।

न्यायालय ने कहा कि विवाह के बाद पैतृक गांव में निरंतर निवास का दावा करना ही सार्वजनिक भर्ती में स्थानीय वरीयता का दावा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। न्यायालय ने कहा, जिले के बाहर विवाह करने वाली उम्मीदवार स्थानीय निवास वरीयता का लाभ तब तक नहीं ले सकती जब तक कि ऐसा निवास ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य द्वारा सिद्ध न हो जाए। हालांकि याचिकाकर्ता ने अपने दावे के समर्थन में पंचायतनामा का हवाला दिया, न्यायालय ने पाया कि रिकॉर्ड में कोई अन्य सहायक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए थे। दूसरी ओर अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत आधिकारिक रिकॉर्ड जिनमें राशन कार्ड, मतदाता सूची और आधार कार्ड शामिल हैं से पता चलता है कि वह जिले के बाहर अपने पति के पते पर रह रही थी।

न्यायमूर्ति वानी ने टिप्पणी की कि आधिकारिक दस्तावेजों के विरुद्ध ठोस खंडन साक्ष्य के अभाव में याचिकाकर्ता का स्थानीय निवासी होने का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता। उच्च न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि अधिकारियों द्वारा याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी को अस्वीकार करना उचित था क्योंकि भर्ती अधिसूचना और उसके शुद्धिपत्र में स्थानीय निवासियों को स्पष्ट रूप से वरीयता दी गई थी। इसलिए निर्धारित वरीयता खंड के अनुसार दूसरे उम्मीदवार का चयन उचित ठहराया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता