भारत-ईयू एफटीए में गैर-शुल्कीय बाधा का समाधान जरूरीः कांग्रेस

नई दिल्ली, 01 जनवरी (हि.स.)। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने यूरोपीय संघ (ईयू) के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम) को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि आज से यानी 1 जनवरी से भारतीय स्टील और एल्युमिनियम निर्यातकों को ईयू के 27 देशों में निर्यात पर कार्बन टैक्स देना होगा, जिससे भारतीय निर्यातकों पर अतिरिक्त लागत का बोझ पड़ेगा।

रमेश ने एक्स पोस्ट में कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का स्टील और एल्युमिनियम निर्यात औसतन 5.8 अरब डॉलर रहा, जो इसके पिछले वर्ष के लगभग 7 अरब डॉलर से कम है। ईयू आयातक पहले से ही सीबीएएम लागू होने की तैयारी कर रहे थे, जिसके चलते हमारे निर्यात में गिरावट आई थी।

थिंक-टैंक जीटीआरआई के अनुमान का हवाला देते हुए रमेश ने कहा कि भारतीय निर्यातकों को अपने उत्पादों की कीमत 15 से 22 प्रतिशत तक घटानी पड़ सकती है ताकि ईयू आयातक उस मार्जिन से कार्बन टैक्स चुका सकें। इसके अलावा, कार्बन उत्सर्जन का विस्तृत लेखा-जोखा और रिपोर्टिंग जैसी दस्तावेजी आवश्यकताएं भी भारतीय निर्यातकों पर अतिरिक्त लागत का बोझ डाल रही हैं।

उन्होंने दावा किया कि भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) इस महीने के अंत तक साइन हो जाएगा लेकिन सरकार को गैर-शुल्कीय बाधा (नॉन-टैरिफ बैरियर) को ध्यान में रखना जरूरी होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर