कांग्रेस का “मनरेगा बचाओ संग्राम”, रमन भल्ला ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना

Congress launches Save MNREGA campaign, Raman Bhalla targets the central government.


जम्मू, 20 जनवरी । जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष रमन भल्ला ने आज आरएस पुरा ब्लॉक की पंचायत मेशियन के गांव तूतरे में “मनरेगा बचाओ संग्राम” अभियान के तहत जनसंपर्क कार्यक्रम जारी रखा। यह अभियान अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा केंद्र सरकार के उस फैसले के विरोध में शुरू किया गया है, जिसमें महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलने का निर्णय लिया गया है। कार्यक्रम का आयोजन तरसेम लाल द्वारा किया गया, जिसका उद्देश्य लोगों को इस कदम के दूरगामी प्रभावों से अवगत कराना और जनमत को संगठित करना रहा।

सभा को संबोधित करते हुए रमन भल्ला ने कहा कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, श्रम की गरिमा और समावेशी विकास का प्रतीक है, जो महात्मा गांधी की विचारधारा से गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि योजना के नाम से महात्मा गांधी को जोड़ना ग्रामीण आत्मनिर्भरता, गरीबों के सशक्तिकरण और गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उनके आदर्शों को श्रद्धांजलि थी। नाम बदलने का प्रयास ग्रामीण कल्याण के बजाय संकीर्ण राजनीतिक सोच को दर्शाता है।

भल्ला ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार योजना को मजबूत करने, समय पर मजदूरी देने और रोजगार के दिनों में बढ़ोतरी करने के बजाय प्रतीकात्मक बदलावों में उलझी हुई है। उन्होंने कहा कि मनरेगा का उद्देश्य 100 दिन का रोजगार, पलायन पर रोक, महिला सशक्तिकरण और टिकाऊ सामुदायिक परिसंपत्तियों का निर्माण था, लेकिन आज इसकी मूल भावना को कमजोर किया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर की स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बेरोजगारी, महंगाई, रोजगार के अवसरों की कमी, भुगतान में देरी और कार्यदिवसों में कटौती ने ग्रामीण परिवारों को गहरे संकट में डाल दिया है।

कार्यक्रम में नेहरू कुंदन (जिला अध्यक्ष, जम्मू ग्रामीण), अमृत बाली महासचिव, पवन भगत, यश पाल सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता और सरपंच-पंच मौजूद रहे। नेहरू कुंदन ने कहा कि मनरेगा एक अधिकार आधारित ऐतिहासिक कानून है और इसका नाम बदलना इसकी विरासत को मिटाने का प्रयास है। वहीं अमृत बाली ने इसे स्वतंत्र भारत के सबसे परिवर्तनकारी कानूनों में से एक बताते हुए कहा कि सरकार को नाम बदलने के बजाय मजदूरी, कार्यदिवस और भुगतान व्यवस्था सुधारने पर ध्यान देना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में कांग्रेस नेताओं ने संकल्प लिया कि “मनरेगा बचाओ संग्राम” को पूरे जम्मू-कश्मीर में तेज किया जाएगा और योजना की पहचान, मूल भावना और ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।