एसआईआर प्रक्रिया पर कांग्रेस का गंभीर आरोप, वोटर लिस्ट से नाम काटने की साजिश का दावा

जयपुर, 15 जनवरी (हि.स.)। राजस्थान में विधानसभा चुनाव में अभी तीन वर्ष शेष होने के बावजूद चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने भाजपा पर वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और कांग्रेस समर्थित मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि एसआईआर की आवश्यकता नहीं होने के बावजूद इसे लागू किया गया, जिसके चलते पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों के चुनावों में अनावश्यक देरी हुई है और अब अशुद्ध व कथित फर्जी वोटर लिस्ट के आधार पर ही चुनाव कराने की स्थिति बन रही है।

प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए डोटासरा ने कहा कि कांग्रेस के बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) ने पूरी जिम्मेदारी के साथ एसआईआर प्रक्रिया में भाग लिया और हर स्तर पर चुनाव आयोग से संवाद व सहयोग किया। इसके बावजूद आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तिथि के दौरान भाजपा के केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व ने गुप्त बैठकों के माध्यम से एसआईआर को प्रभावित करने की रणनीति बनाई।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के राजस्थान प्रभारी बी.एल. संतोष और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के जयपुर दौरे के बाद आनन-फानन में मुख्यमंत्री कार्यालय से विधानसभा क्षेत्रवार डेटा पेन ड्राइव के माध्यम से भाजपा नेताओं को दिया गया।

डोटासरा ने दावा किया कि इसी डेटा के आधार पर केंद्रीयकृत एजेंसियों के जरिए पहले से प्रिंटेड फार्म तैयार कराए गए, जिन पर फर्जी हस्ताक्षर हैं और कई मामलों में बीएलए के हस्ताक्षर तक नहीं हैं। नियमों के अनुसार एक बीएलए एक दिन में केवल 50 नाम काटने के आवेदन दे सकता है, लेकिन भाजपा द्वारा हजारों की संख्या में बल्क आवेदन जमा कराए जा रहे हैं, वह भी ड्राफ्ट प्रकाशन से ठीक पहले। इसका उद्देश्य कांग्रेस समर्थित मतदाताओं विशेषकर दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक और भाजपा नीतियों के विरोध में सक्रिय लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाना बताया गया।

उन्होंने चुनाव आयोग के 14 जनवरी 2026 तक जारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि भाजपा के 973 बीएलए ने नाम जोड़ने के लिए केवल 211 आवेदन दिए, जबकि नाम हटाने के लिए 5694 आवेदन प्रस्तुत किए। इसके विपरीत कांग्रेस के 110 बीएलए ने 185 नाम जोड़ने और मात्र 2 नाम हटाने की आपत्तियां दर्ज कराईं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ही विधानसभा क्षेत्र में 2000 से 4000 आवेदन एक ही दिन में जमा कराए जा रहे हैं, जो पूरी तरह नियमों के खिलाफ है।

डोटासरा ने कहा कि फार्म-7 के तहत नाम काटने के लिए शपथ-पत्र और साक्ष्य अनिवार्य हैं, लेकिन अधिकांश आवेदनों में न तो पूरी जानकारी है और न ही अंडरटेकिंग पर हस्ताक्षर। इसके बावजूद चुनाव अधिकारियों और बीएलओ पर इन फार्मों को स्वीकार करने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जिला कलेक्टर और चुनाव अधिकारी भाजपा के दबाव में नियमविरुद्ध कार्य करते हैं तो कांग्रेस कार्यकर्ता चुप नहीं बैठेंगे और इसका कड़ा विरोध करेंगे।

प्रेसवार्ता में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी अपने विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले 4000 आवेदन आए थे, लेकिन अचानक यह संख्या 12000 तक पहुंच गई। उन्होंने मांग की कि निर्वाचन अधिकारियों के कार्यालयों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज सार्वजनिक की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इतनी बड़ी संख्या में फार्म किसने और कैसे जमा कराए। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति द्वारा सैकड़ों आवेदन एक साथ जमा करना नियमों का खुला उल्लंघन है और इस पर तत्काल मुकदमा दर्ज होना चाहिए।

इस अवसर पर विधानसभा में मुख्य सचेतक रफीक खान ने आदर्शनगर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस पार्षद और उसके परिवार के नाम फर्जी हस्ताक्षरों से काटने के प्रयास का आरोप लगाया। वहीं प्रदेश कांग्रेस मीडिया सेंटर पर बीएलए, मतदाताओं और अलवर में बल्क आवेदनों से जुड़े वीडियो भी प्रदर्शित किए गए।

डोटासरा और जूली ने राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त नवीन महाजन से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और एसआईआर प्रक्रिया में हो रही कथित अनियमितताओं पर तत्काल रोक लगाने तथा निष्पक्ष जांच की मांग की।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित