विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा : दंपती से 13.75 लाख की धोखाधड़ी, केस दर्ज

जोधपुर, 06 जनवरी (हि.स.)। विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी और अमानवीय प्रताडऩा का एक मामला पुलिस में दर्ज हुआ है। इस घटना ने एक बार फिर ‘डंकी रूट’(अवैध तरीके से विदेश जाना) के खतरों को उजागर कर दिया है। शातिर ठगों ने एक दंपती को अमेरिका और जापान में नौकरी का सपना दिखाया, लेकिन ट्रंप सरकार का बहाना बनाकर अचानक प्लान बदल दिया और हकीकत में अमेरिका-जापान की बजाय उन्हें बैंकॉक, मकाऊ और कोरिया जैसे देशों में भटकने पर मजबूर कर दिया, जहां उन्हें मानसिक और शारीरिक यातनाएं झेलनी पड़ीं। इस बीच मेें पीडि़ता और उसके पति को विदेशी जेल में रहना पड़ा, भूखे-प्यासे दिन गुजारने पड़े और अंत में दुबई में बंधक बनाकर रखा गया। पीडि़त दंपती की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एफआईआर में कुल 13 लाख 75 हजार रुपए की ठगी और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया है।

चौहाबो पुलिस ने बताया कि बीआर बिड़ला स्कूल के पास आदेश्वर नगर निवासी एक दंपती विदेश में नौकरी करना चाहते थे। अप्रैल 2025 में उनकी बात कुचामन के डीडवाना निवासी इशा अग्रवाल और बाबूलाल पंवार से हुई। आरोपियों ने दंपती को भरोसे में लेने के लिए विदेश भेजने के कई झूठे किस्से सुनाए। शुरुआत में आरोपियों ने यूएसए या जापान में नौकरी दिलाने का वादा किया और इसके बदले 21 लाख रुपए की मांग की। भरोसे के तौर पर 50 हजार रुपए एडवांस ले लिए। कुछ दिन बाद आरोपियों ने कहा कि अभी यूएसए में ट्रंप सरकार है और वहां काम की अनिश्चितता है, इसलिए वे उन्हें यूके या जापान भेज देंगे। अंत में कोरिया (जेजू) में अच्छी नौकरी और रहने-खाने की सुविधा का झांसा देकर डील पक्की की गई।

आरोपियों ने दंपती को दिल्ली बुलाया। वहां दो दिन रोका और कोरिया भेजने के नाम पर 4 हजार यूएस डॉलर एक्सचेंज करवाए। साथ ही एक लाख रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लिए। दिल्ली एयरपोर्ट पर आरोपियों ने दंपती को सीधे कोरिया के बजाय बैंकॉक का टिकट थमा दिया। कहा गया कि यह रूट है- बैंकॉक से मकाऊ, फिर सिंगापुर होते हुए कोरिया। जैसे ही दंपती बैंकॉक पहुंचे, इमिग्रेशन ने उन्हें रोक लिया। घबराकर उन्होंने आरोपियों को कॉल किया तो आरोपियों ने कहा कि 3 लाख रुपए भेजो तभी एंट्री मिलेगी। मजबूरी में पैसे ट्रांसफर किए गए। वहां खाने-पीने का खर्च भी खुद उठाना पड़ा। बैंकॉक से उन्हें मकाऊ भेजा गया। वहां फिर वही कहानी दोहराई गई। इमिग्रेशन ने रोका और आरोपियों ने छोडऩे के नाम पर फिर 3 लाख रुपए ठग लिए। मकाऊ से उन्हें शिप (जहाज) के जरिए हांगकांग भेजा गया। वहां दो दिन अपने खर्च पर रुकने के बाद वे कोरिया के लिए रवाना हुए। कोरिया (जेजू) एयरपोर्ट पहुंचते ही इमिग्रेशन अधिकारियों ने दंपती को हिरासत में ले लिया। उन्हें चार दिन तक जेल में रहना पड़ा। आरोपियों ने यहां भी खेल खेला और वकील करने के नाम पर 25 हजार रुपए ऐंठ लिए, लेकिन कोई वकील नहीं आया। दंपती जेल में भूखे-प्यासे रहे और अंतत: उन्हें भारत डिपोर्ट कर दिया गया।

भारत लौटने पर जब पीडि़तों ने आरोपियों से अपने पैसे वापस मांगे और नाराजगी जताई, तो आरोपी उनके पैरों में गिर गए। उन्होंने माफी मांगी और कहा कि पिछला काम बिगड़ गया था, लेकिन अब वे दुबई में पक्की नौकरी लगवा देंगे। फिर दंपती उनके झांसे में आ गया। आरोपी उन्हें साथ लेकर दुबई गए। वहां दो लाख रुपए नकद लिए और एक ऑफिस में ले जाकर परमानेंट जॉब का भरोसा दिलाकर 6 लाख रुपए और ट्रांसफर करवा लिए। दुबई में 15 दिन तक दंपती को एक घर में रखा गया, लेकिन कोई काम नहीं दिलाया। जब उन्होंने नौकरी के लिए तकाजा किया, तो आरोपियों ने रंग बदल लिया। उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई और पासपोर्ट छीनकर बंधक बना लिया गया। छोडऩे के बदले फिर पैसों की मांग की गई।

रिपोर्ट के अनुसार एक दिन मौका पाकर दंपती को अपने पासपोर्ट मिल गए और वे वहां से भागकर किसी तरह इंडिया वापस लौटे। भारत आकर जब पीडि़त 5-6 दिन पहले डीडवाना स्थित आरोपियों के घर गए और अपने 13.75 लाख रुपए वापस मांगे, तो आरोपियों ने उल्टे 10 लाख रुपए की डिमांड कर दी। उन्होंने धमकी दी कि अगर पैसे नहीं दिए तो जान से मार देंगे। आखिरकार परेशान होकर पीडि़त महिला ने कोर्ट के जरिए इस्तगासा पेश किया। जिस पर पुलिस थाना चौपासनी हाउसिंग बोर्ड ने पुलिस ने आरोपी ईशा अग्रवाल और बाबूलाल के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश