शिमला, 10 जनवरी (हि.स.)। मुद्रण एवं लेखन सामग्री विभाग ने सरकारी कैलेंडर-2026 को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे फर्जी दावों को भ्रामक और गैरकानूनी बताया है। विभाग के एक प्रवक्ता ने शनिवार को कहा कि कुछ लोगों ने विभाग द्वारा मुद्रित सरकारी कैलेंडर-2026 के साथ छेड़छाड़ कर उसकी बदली हुई तस्वीरें और सामग्री सोशल मीडिया पर प्रसारित की हैं। इन पोस्ट में वास्तविक तिथियों को जानबूझकर अव्यवस्थित और अवास्तविक रूप में दिखाया गया है, जिससे लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।
प्रवक्ता के अनुसार विभाग द्वारा आधिकारिक तौर पर मुद्रित कैलेंडर में इस तरह की कोई गलती नहीं है, लेकिन असली कैलेंडर को संपादित कर अनाधिकृत तरीके से सोशल मीडिया पर दिखाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की सामग्री न केवल गलत धारणा फैलाने का प्रयास है, बल्कि यह अनैतिक और गैरकानूनी भी है। इससे विभाग की छवि को नुकसान पहुंचा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सीआईडी के साइबर क्राइम सेल ने इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फर्जी पोस्ट किसने और किस उद्देश्य से प्रसारित कीं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इसके पीछे किसी संगठित प्रयास की भूमिका तो नहीं है।
विभाग ने आम लोगों से अपील की है कि वे फेसबुक या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर वायरल हो रही ऐसी फर्जी और भ्रामक पोस्ट पर भरोसा न करें।
प्रवक्ता ने कहा कि लोग न तो इन पोस्ट को साझा करें और न ही आगे बढ़ाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी कैलेंडर से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा किया जाना चाहिए।
पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा



