- आईआरएल सेंटर को सीटीडी से एडवांस्ड ड्रग ससेप्टिबिलिटी टेस्टिंग के लिए मिला सर्टिफिकेशन
नई दिल्ली, 12 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली की इंटरमीडिएट रेफरेंस लेबोरेटरी (आईआरएल) सेंटर ने भारत सरकार के सेंट्रल ट्यूबरकुलोसिस डिवीजन (सीटीडी) से पहला सर्टिफिकेशन हासिल करके एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। यह सर्टिफिकेशन बेडाक्विलाइन (बीडीयू) और प्रेटोमेनिड के लिए एडवांस्ड ड्रग ससेप्टिबिलिटी टेस्टिंग (डीएसटी) करने के लिए मिला है। ये दोनों दवाएं दुनियाभर में ड्रग-रेसिस्टेंट ट्यूबरकुलोसिस (डीआर-टीबी) मरीजों के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाती हैं। यह जानकारी सोमवार को दिल्ली सरकार ने एक विज्ञप्ति में दी।
विज्ञप्ति के मुताबिक सीटीडी से मिला यह सर्टिफिकेशन राजधानी दिल्ली में ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिससे राजधानी दिल्ली की मल्टीड्रग-रेजिस्टेंट (एमडीआर-टीबी) और एक्सटेंसिवली ड्रग-रेज़िस्टेंट ट्यूबरकुलोसिस (एक्सडीआर-टीबी) का सटीक पता लगाकर इलाज और प्रबंधन करने की इन-हाउस क्षमता और ज्यादा मजबूत होगी। पहले एडवांस्ड डीएसटी की जरूरत वाले कई मरीजों के सैंपल जांच के लिए राज्य से बाहर भेजने पड़ते थे, जिससे कई बार डायग्नोसिस और इलाज में देरी होती थी। अब मंजूरी मिलने के बाद राजधानी में टेस्टिंग की बेहतर सुविधा होने से दिल्ली के मरीजों को अब तेजी से क्लिनिकल नतीजे मिलेंगे और ट्यूबरक्लोसिस का समय रहते इलाज सुनिश्चित होगा।
दिल्ली की इंटरमीडिएट रेफरेंस लेबोरेटरी (आईआरएल) सेंटर देश की सबसे एडवांस्ड लैबोरेटरी में से एक है, जो बीएसएल-3 लैबोरेटरी सुविधा, एमजीआईटी 960, लाइन प्रोब ऐसे, होल जीनोम सीक्वेंसिंग, ट्रूनेट, पैथोडिटेक्ट और रियल-टाइम पीसीआर जैसी अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी से लैस है। ये सभी उच्च स्तरीय डायग्नोस्टिक प्लेटफॉर्म पूरी तरह से राष्ट्रीय और वैश्विक मानकों के अनुरूप ट्यूबरक्लोसिस का सटीक और व्यापक जांच को सुनिश्चित करते हैं।
केवल वर्ष 2025 में ही लैब ने 30,000 से ज़्यादा सैंपल प्रोसेस किए, जो पूरे राज्य में टीबी की जांच और इलाज में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। राजधानी दिल्ली ने नेशनल टीबी एलिमिनेशन प्रोग्राम के तहत टीबी देखभाल को मजबूत करने में लगातार अपनी बेहतरीन लीडरशिप दिखाई है। राजधानी दिल्ली ने डब्लूएचओ द्वारा सुझाए गए नए बीपीएएलएम रेजिमेन पर सबसे ज़्यादा ( दिसंबर 2024 से लेकर अबतक 1065) ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी मरीजों को नामांकित किया है। यह एक ज्यादा असरदार इलाज है, जिसकी सफलता दर अधिक और मृत्यु दर कम है।
इसके साथ ही दिल्ली हाई-रिस्क और सघन इलाकों में एक्टिव केस फाइंडिंग (एसीएफ) ड्राइव को तेजी से बढ़ा रहा है। रैपिड मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स की मदद से यह अभियान टीबी और ड्रग रेजिस्टेंस का जल्दी पता लगाने, तुरंत इलाज शुरू करने, लगातार देखभाल और प्रभावी प्रबंधन को सुनिश्चित करते हैं।
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने आज कहा कि भारत सरकार के सेंट्रल ट्यूबरकुलोसिस डिवीजन (सीटीडी) से मिला सर्टिफ़िकेशन ट्यूबरक्लोसिस खत्म करने के हमारे लगातार प्रयासों के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। बेडाक्विलाइन और प्रेटोमैनिड के लिए राजधानी दिल्ली में ही डीएसटी की सुविधा देकर हम अपने मरीजों के लिए बेहद तेज, ज्यादा सटीक डायग्नोसिस और समय पर इलाज सुनिश्चित कर रहे हैं।
नई ड्रग डीएसटी क्षमता का इंटीग्रेशन, बीपीएएलएम जैसे एडवांस्ड ट्रीटमेंट का तेजी से विस्तार और मजबूत एसीएफ अभियान राष्ट्रीय टीबी मुक्त भारत अभियान को सपोर्ट करने के लिए दिल्ली की अटूट प्रतिबद्धता को दिखाती हैं।
दिल्ली सरकार का यह महत्वपूर्ण कदम राजधानी दिल्ली में टीबी से निपटने के तरीके में एक बड़ा बदलाव लाएगा, जिससे डायग्नोस्टिक क्षमता बढ़ेगी, मरीजों के उन्मूलन के नतीजे बेहतर होंगे और आने वाले सालों में भारत के टीबी खत्म करने के लक्ष्य की प्रगति को सुनिश्चित करते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव



