कैथल :निजी अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत, परिजनों ने किया हंगामा

कैथल, 11 जनवरी (हि.स.)। शहर के एक निजी अस्पताल में डिलीवरी के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत का मामला सामने आया है। घटना से आक्रोशित परिजनों ने रविवार को अस्पताल में हंगामा करते हुए चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाया। सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और परिजनों को शांत करवाया। परिजनों का कहना है कि इलाज में लापरवाही के कारण पहले बच्चे और बाद में महिला की मौत हुई है। उन्होंने अस्पताल के डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

परिजनों के अनुसार राधा स्वामी कॉलोनी निवासी पिंकी को डिलीवरी के लिए कैथल के सरकारी अस्पताल लेकर गए थे। वहां उन्हें बताया गया कि गर्भ में ही बच्चे की मौत हो चुकी है। परिजनों का आरोप है कि उसी दौरान एक आशा वर्कर ने उन्हें गुमराह किया और हाई-रिस्क डिलीवरी बताकर महिला को शहर के निजी अस्पताल में रेफर करवा दिया। निजी अस्पताल में इलाज के दौरान पहले बच्चे की और बाद में महिला की भी मौत हो गई।

परिजनों का कहना है कि यदि डिलीवरी गंभीर थी तो इलाज सरकारी अस्पताल में ही होना चाहिए था या फिर चंडीगढ़ पीजीआई अथवा करनाल के कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में रेफर किया जाना चाहिए था। आरोप है कि आशा वर्कर ने बार-बार निजी अस्पताल में ले जाने का दबाव बनाया, जहां इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई।

मृतका की सास रुकमणी ने आरोप लगाया कि निजी अस्पताल में उनसे पहले ही 20 हजार रुपये जमा करवा लिए गए थे। बच्चे की मौत के बाद जब वे बच्चे का अंतिम संस्कार करने गए, तो पीछे से उनकी बहू पिंकी को अस्पताल स्टाफ स्वयं ही सरकारी अस्पताल में छोड़ आया। जब पिंकी को निजी अस्पताल से स्ट्रेचर पर ले जाया गया, तब वह बेहोश थी। डॉक्टरों ने कहा कि वह कुछ देर में होश में आ जाएगी, जबकि परिजनों का आरोप है कि पिंकी की मौत निजी अस्पताल में ही डॉक्टरों की लापरवाही से हो चुकी थी। उनका कहना है कि बच्चे की मौत के सदमे को मां सहन नहीं कर पाई।

अस्पताल की संचालिका एवं महिला रोग विशेषज्ञ डा. मोनिका ने बताया कि जब महिला को उनके अस्पताल लाया गया था, तब गर्भ में ही बच्चे की मौत हो चुकी थी। अस्पताल में सामान्य डिलीवरी का प्रयास किया गया। बच्चे की डिलीवरी के बाद महिला की अत्यधिक ब्लीडिंग शुरू हो गई, जिसे रोकने के लिए ऑपरेशन करना पड़ा और बच्चेदानी भी निकालनी पड़ी। ब्लीडिंग रुक गई थी, लेकिन महिला की हालत में सुधार नहीं हुआ, जिसके बाद उसे सरकारी अस्पताल रेफर कर दिया गया। सिविल सर्जन डा. रेनू चावला ने कहा कि मामले की जांच के लिए कमेटी का गठन किया जाएगा। कमेटी सभी तथ्यों की जांच करेगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज अत्रे