जल शक्ति विभाग ने शुरू की ‘नॉलेज शेयरिंग एंड आइडिएशन’ कार्यशाला श्रृंखला

जम्मू। स्टेट समाचार
जल शक्ति विभाग ने अपने इंजीनियरों और अधिकारियों के बीच तकनीकी ज्ञान, फील्ड अनुभव और बेहतर कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान के लिए ‘नॉलेज शेयरिंग एंड आइडिएशन’ कार्यशाला श्रृंखला शुरू की है। इसका उद्घाटन जल शक्ति मंत्री जावेद अहमद राणा ने अतिरिक्त मुख्य सचिव शालीन काबरा की मौजूदगी में किया। कार्यशाला श्रृंखला के तहत प्रत्येक शुक्रवार शाम 4 से 5 बजे तक तकनीकी विषयों, परियोजना योजना एवं क्रियान्वयन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नई तकनीकों, नवाचारों, फील्ड अनुभव और विभागीय प्रक्रियाओं पर सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसमें विभाग के इंजीनियर और राजपत्रित अधिकारी हिस्सा लेंगे।
पहला सत्र ऑनलाइन आयोजित किया गया, जिसमें जम्मू-कश्मीर के विभिन्न हिस्सों से 1,519 इंजीनियर शामिल हुए। इनमें कश्मीर से 788 और जम्मू से 731 इंजीनियर थे। इस दौरान मुख्य अभियंताओं के सभी कार्यालयों, 14 अधीक्षण अभियंताओं और 74 कार्यकारी अभियंताओं के कार्यालय जुड़े रहे। तकनीकी प्रस्तुतियों के बाद प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें युवा इंजीनियरों ने सक्रिय भागीदारी की। पहले सत्र में बाढ़ नियंत्रण संभाग, सांबा के एईई सुनील सिंह ने ‘तवी नदी के फ्लड प्लेन जोनिंग और जोखिम प्रबंधन’ तथा आईएंडएफसी कुपवाड़ा के एक्सईएन मुयीद रसूल ने ‘संरचनाओं की भूकंपीय सुरक्षा’ विषय पर प्रस्तुति दी।
जल शक्ति मंत्री जावेद अहमद राणा ने पहल की सराहना करते हुए कहा कि बिना अतिरिक्त वित्तीय बोझ के इंजीनियरों के पेशेवर कौशल को बढ़ाने की दिशा में यह उपयोगी कदम है। उन्होंने निरंतर सीखने, नए कौशल अपनाने और सेवा वितरण में सुधार के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर जोर दिया। कार्यशाला श्रृंखला के समन्वय और संचालन के लिए डिजाइन, निरीक्षण एवं गुणवत्ता नियंत्रण विंग को नोडल एजेंसी बनाया गया है। विभाग के अनुसार, आई-गॉट कर्मयोगी के तहत जल शक्ति विभाग के सभी 15,556 कर्मचारियों का पंजीकरण किया जा चुका है और 3.20 लाख पाठ्यक्रम पूरे किए गए हैं।
विभाग ने बताया कि कार्यशालाओं के माध्यम से नए नियुक्त सहायक अभियंताओं और जूनियर अभियंताओं को विभागीय प्रक्रियाओं, परियोजना क्रियान्वयन, गुणवत्ता प्रबंधन और फील्ड जिम्मेदारियों की व्यावहारिक जानकारी देने पर भी ध्यान दिया जाएगा। कार्यशालाओं में तैयार प्रस्तुतियों और अध्ययन सामग्री को संकलित कर डीआईक्यूसी की वेबसाइट पर उपलब्ध कराने तथा आगे इनके आधार पर ऑनलाइन पाठ्यक्रम विकसित करने की योजना है। अतिरिक्त मुख्य सचिव शालीन काबरा ने पहल के लिए मंत्री के सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन प्रारूप से कनिष्ठ अधिकारियों को वरिष्ठ अधिकारियों और अनुभवी सहयोगियों के साथ सीधे संवाद तथा अपने सवाल रखने का अवसर मिलता है।