हैम रेडियो से गंगासागर में नई डिजिटल क्रांति, सुरक्षित संचार से बढ़ेगी यात्रियों की सुरक्षा
- Admin Admin
- Jan 03, 2026
कोलकाता, 03 जनवरी (हि.स.)। गंगासागर मेले में इस बार हैम रेडियो के जरिए नई डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया से सुरक्षित और तेज संचार संभव हो सकेगा। इस नई व्यवस्था का मकसद संदेशों को सुरक्षित रखना और यात्रियों की सुरक्षा को और मजबूत करना है। हैम रेडियो के माध्यम से अब देश के किसी भी हिस्से में कुछ ही पलों में सुरक्षित संदेश भेजे जा सकेंगे।
अब तक वेस्ट बंगाल रेडियो क्लब के हैम रेडियो ऑपरेटर जिला प्रशासन के अनुरोध पर गंगासागर मेले में एनालॉग रेडियो के जरिए सेवाएं देते रहे हैं। मेले के दौरान खोए हुए लोगों की जानकारी पहुंचाने से लेकर गंभीर रूप से बीमार तीर्थयात्रियों को बेहतर इलाज के लिए एयर एंबुलेंस से कोलकाता के विभिन्न सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में भेजने तक, हैम रेडियो ने अहम भूमिका निभाई है। कई बार ऐसे मरीजों के परिजनों का पता न होने की स्थिति में भी हैम रेडियो के जरिए देश के अलग अलग हिस्सों में सूचना पहुंचाई गई है। नई डिजिटल तकनीक के आने से यह काम और तेज तथा प्रभावी होने की उम्मीद है।
बताया गया है कि अब संदेश सीधे देशभर के हैम रेडियो ऑपरेटरों तक तुरंत पहुंच सकेंगे, जिससे परिणाम भी जल्दी मिलेंगे। पिछले 36 वर्षों से हैम रेडियो ऑपरेटर अस्थायी कंट्रोल रूम के माध्यम से पूरे देश में संदेश भेजते आ रहे हैं। इस बार मेले के भौगोलिक बदलाव और भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए कंट्रोल रूम पर दबाव अधिक रहने की आशंका है। साथ ही, इस बार कुंभ मेले के न होने के कारण देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों के गंगासागर आने की संभावना जताई जा रही है।
गंगासागर मेले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में भी यह तकनीक अहम मानी जा रही है। रेडियो सोसाइटी ऑफ ग्रेट ब्रिटेन की ओर से गंगासागर द्वीप को एएस 153 के रूप में मान्यता मिली है। इससे विश्व मानचित्र पर गंगासागर द्वीप की भौगोलिक स्थिति को खास महत्व मिला है। इसका असर यह हुआ है कि साल भर विदेशों से बड़ी संख्या में पर्यटक सागर आते हैं, जिससे स्थानीय लोगों के आर्थिक विकास की उम्मीद भी बढ़ी है। मेले के दौरान विदेशी पर्यटक भी लगातार जानकारी चाहते हैं, ऐसे में रेडियो के जरिए उन्हें लाइव अपडेट मिल सकेगा। आपदा की स्थिति में भी यह संचार व्यवस्था बेहद उपयोगी साबित होगी।
इस नई व्यवस्था में डीएमआर यानी डिजिटल मोबाइल रेडियो तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि संदेश पूरी तरह गोपनीय रहेंगे। जरूरी और संवेदनशील सूचनाएं केवल संबंधित लोग ही सुन सकेंगे, कोई बाहरी व्यक्ति उस संदेश को नहीं सुन पाएगा। भीड़ और शोर के बीच माइक्रोफोन से वाहन नंबर या अन्य जरूरी जानकारी सुनाई न देने की समस्या भी खत्म हो जाएगी, क्योंकि रेडियो के जरिए सीधे संदेश और एसएमएस भेजे जा सकेंगे। इस तरह गंगासागर मेला अब पूरी तरह डिजिटल युग में प्रवेश कर रहा है।
वेस्ट बंगाल रेडियो क्लब के संपादक अंबरिश नाग विश्वास ने बताया कि यह तकनीक गंगासागर मेले की सुरक्षा और संचार व्यवस्था को एक नई दिशा देगी। इस पहल को सफल बनाने में जयंता बैद्य, हीरक सिन्हा, दिबोस मंडल, सौमिक घोष और रिंकू नाग विश्वास की भी अहम भूमिका रही है। आयोजकों का कहना है कि हैम रेडियो के इस डिजिटल प्रयोग से गंगासागर मेला न सिर्फ सुरक्षित बनेगा, बल्कि दुनिया के सामने एक आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम आयोजन के रूप में भी उभरेगा।
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर



