पार्टी के लिए हमेशा मैदान में उतरने को तैयार हूं, नया आने वालों को संगठन की संस्कृति समझनी होगी : दिलीप घोष

कोलकाता, 01 जनवरी (हि. स.)। पश्चिम बंगाल भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व सांसद दिलीप घोष ने नए साल के पहले दिन एक बार फिर राजनीतिक सक्रियता का संकेत देते हुए कहा कि पार्टी में जो भी नया आता है, उसे संगठन की संस्कृति और कार्यशैली को समझना होता है। गुरुवार को कोलकाता स्थित भाजपा के प्रदेश कार्यालय में आयोजित पत्रकार सम्मेलन में दिलीप घोष ने साफ कहा कि वह पार्टी का हिस्सा हैं और पार्टी जो जिम्मेदारी देगी, उसे पूरी निष्ठा से निभाएंगे।

दिलीप घोष लंबे समय से सक्रिय राजनीति से कुछ हद तक दूर थे और पिछले लगभग आठ से नौ महीनों में वह नियमित रूप से पार्टी कार्यक्रमों में नजर नहीं आए। हालांकि 31 दिसंबर को सॉल्टलेक में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ उनकी बंद कमरे में हुई बैठक के बाद उनके राजनीतिक भूमिका को लेकर अटकलें तेज हो गईं।

सूत्रों के अनुसार, आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी उन्हें एक बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकती है।

अमित शाह के साथ हुई बैठक को लेकर दिलीप घोष ने कहा कि उन्हें चुनावी तैयारियों को लेकर चर्चा के लिए बुलाया गया था। संगठनात्मक मुद्दों पर बातचीत हुई और उन्होंने स्वयं यह भी जानने की कोशिश की कि पार्टी उनके लिए क्या भूमिका तय करना चाहती है। हालांकि फिलहाल उन्हें कोई स्पष्ट जिम्मेदारी नहीं दी गई है। दिलीप ने कहा कि वह पूरी तरह उपलब्ध हैं और पार्टी जिस तरह कहेगी, उसी तरह काम करेंगे।

तृणमूल कांग्रेस में जाने की अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए दिलीप घोष ने तंज कसते हुए कहा कि लोग नई नई कल्पनाएं करते रहें, उन्हें इस पर और कुछ कहने की जरूरत नहीं है। खड़गपुर से उम्मीदवार बनने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह फैसला पार्टी करेगी और यदि पार्टी को लगता है कि उनके चुनाव लड़ने से संगठन को फायदा होगा, तो वह जरूर मैदान में उतरेंगे।

भाजपा में पुराने और नए नेताओं के बीच कथित मतभेदों को लेकर दिलीप घोष ने कहा कि पार्टी एक सतत प्रक्रिया है, जिसमें लोग आते रहते हैं और कुछ लोग चले भी जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आदी और नए जैसा कोई विभाजन नहीं है। जो लोग नए आए हैं, उनकी जिम्मेदारी है कि वे पार्टी में घुल मिलकर खुद को भाजपा कार्यकर्ता के रूप में साबित करें और कई लोग ऐसा कर भी रहे हैं।

यह पूछे जाने पर कि क्या पार्टी के नए नेता उन्हें समझ नहीं पा रहे हैं, दिलीप घोष ने कहा कि उन्हें किसी तरह का बड़ा द्वंद्व नजर नहीं आता। पार्टी उन्हें समझ ले, वही काफी है। बाकी कौन समझ रहा है या नहीं, यह समझाने की जिम्मेदारी उनकी नहीं है।

पूर्व में पार्टी कार्यकर्ताओं के एक वर्ग के विरोध को लेकर पूछे गए सवाल पर दिलीप घोष ने कहा कि भाजपा के कार्यकर्ताओं ने उनके खिलाफ प्रदर्शन नहीं किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग बाहर से आकर ऐसे प्रदर्शन कर रहे थे, जो अपनी पुरानी राजनीतिक आदतें नहीं छोड़ पाए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग यह भूल जाते हैं कि कब और किसे काला झंडा दिखाना है।

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर