पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर निर्वाचन आयोग की सफाई

कोलकाता, 19 जनवरी (हि.स.)। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बड़ी संख्या में सामने आई गड़बड़ियों को लेकर भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने स्थिति स्पष्ट की है। आयोग ने बताया कि राज्य में बड़ी संख्या में ऐसे मामले पाए गए हैं, जिनमें मतदाताओं के पारिवारिक विवरण में गंभीर असंगतियां हैं।

निर्वाचन आयोग ने बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान पश्चिम बंगाल में करीब 94 लाख मामलों को ‘तार्किक विसंगति’ के रूप में चिन्हित किया गया है। ये गड़बड़ियां वंशावली मिलान प्रक्रिया के समय सामने आईं, जब मतदाता सूची में अविश्वसनीय पारिवारिक संबंध दर्ज पाए गए।

मतदाता सूची के मसौदे पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथि सोमवार है। सुनवाई की प्रक्रिया 7 फरवरी तक चलेगी और अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी को जारी की जाएगी। इसके बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा की जाएगी।

पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, कई मामलों में फर्जी मतदाताओं ने असली मतदाताओं से झूठे रिश्ते जोड़कर अपने नाम मतदाता सूची में बनाए रखने की कोशिश की।

एक अधिकारी ने बताया कि कुछ वरिष्ठ नागरिक मतदाताओं को 8-10 लोगों का पिता या माता दिखाया गया, जबकि जांच में सामने आया कि उनके वास्तव में केवल दो ही बच्चे हैं और सूची में दर्ज अन्य लोगों से उनका कोई रक्त संबंध नहीं है।

एक अन्य मामले में 64 वर्षीय मतदाता को 60 और 59 वर्ष के दो व्यक्तियों का पिता दर्शाया गया था। अधिकारी के अनुसार, इसका अर्थ यह निकलता है कि संबंधित व्यक्ति पांच वर्ष की उम्र में पिता बना, जो असंभव है। बाद में जांच में यह दोनों ही फर्जी मतदाता पाए गए।

निर्वाचन आयोग ने माना कि सुनवाई के लिए मतदाताओं, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों को बुलाए जाने को लेकर कुछ राजनीतिक दलों ने आपत्ति जताई है। हालांकि आयोग ने साफ कहा कि इस तरह की गड़बड़ियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

आयोग का कहना है कि उसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी वास्तविक मतदाता सूची से बाहर न हो और कोई भी फर्जी मतदाता सूची में बना न रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर