बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को एसआईआर सुनवाई में बुलाने पर भड़का डॉक्टर्स फोरम, चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी
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- Jan 01, 2026
कोलकाता, 01 जनवरी (हि.स.)। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर अब डॉक्टरों का गुस्सा फूट पड़ा है। सर्विस डॉक्टर्स फोरम ने बुजुर्गों, गंभीर रूप से बीमार और दिव्यांग लोगों को सुनवाई के लिए बुलाए जाने को अमानवीय बताते हुए चुनाव आयोग के खिलाफ बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।
डॉक्टर्स फोरम पश्चिम बंगाल के चिकित्सकों का एक प्रमुख संगठन है, जिसने अगस्त 2024 में कोलकाता के आर जी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में जूनियर डॉक्टर के साथ हुई दुष्कर्म और हत्या की घटना के बाद राज्यव्यापी आंदोलन का नेतृत्व किया था। अब संगठन ने नए साल में चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन शुरू करने का फैसला किया है।
सूत्रों के मुताबिक, एसआईआर प्रक्रिया के तहत दावे और आपत्तियों की सुनवाई शुरू होने के बाद से लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों, दिव्यांगों और बुजुर्गों को दूर-दराज स्थित सुनवाई केंद्रों पर बुलाया जा रहा है। कई मामलों में 80 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को भी लंबी कतारों में खड़े होने के लिए मजबूर किया गया है। यहां तक कि गंभीर हालत वाले मरीजों को भी सुनवाई केंद्रों पर पेश होना पड़ा है।
हाल ही में चुनाव आयोग ने यह निर्देश दिया था कि 85 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की सुनवाई उनके घर पर की जाए। लेकिन जमीनी स्तर पर इस निर्देश का पालन नहीं हो रहा है। नतीजतन बेहद कमजोर और असहाय बुजुर्गों को भी सुनवाई केंद्रों पर बुलाया जा रहा है।
डॉक्टर्स फोरम का आरोप है कि दिव्यांग लोगों के साथ-साथ ऐसे डॉक्टरों को भी नोटिस भेजे जा रहे हैं, जो हजारों मरीजों के इलाज से जुड़े हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर भी गंभीर असर पड़ रहा है।
फोरम के एक सदस्य ने कहा कि युद्ध जैसी आपात परिस्थितियों में भी गंभीर बीमार, बुजुर्ग, दिव्यांग और आवश्यक सेवाओं से जुड़े लोगों को छूट दी जाती है। लेकिन एसआईआर प्रक्रिया में ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिल रहा है। संगठन ने इस अमानवीय स्थिति को तत्काल बदलने की मांग करते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त को फैक्स भेजा है।
डॉक्टर्स फोरम ने साफ कर दिया है कि यदि जल्द ही इस मामले में सुधार नहीं किया गया, तो संगठन के पास आंदोलन शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर



