देश का पूर्वांचल,सतत प्रगति की दिशा देगा_ठाणे में अतुल कुलकर्णी का दावा

मुंबई,14जनवरी ( हि.स.) । देश का नॉर्थ-ईस्ट इंडिया का पूर्वांचल प्रदेश, जिसमें उद्योगों, कृषि और पर्यटन सेक्टर के विकास की बहुत संभावना है, विकास की राह पर है और अगर प्राकृतिक श्रोतों का सही इस्तेमाल किया जाए और आधुनिक तकनीक को शामिल किया जाए, तो पूर्वांचल भविष्य में सस्टेनेबल डेवलपमेंट( सतत विकास) का प्रतीक होगा। यह भविष्यवाणी आईआईएम शिलॉन्ग बोर्ड ऑफ़ ट्रस्टीज़ के मेंबर और अमेजिंग नमस्ते फ़ाउंडेशन, गुवाहाटी के चेयरमैन अतुल कुलकर्णी ने की ठाणे में व्यक्त की। वह ठाणे में हो रही रामभाऊ म्हालगी लेक्चर सीरीज़ में बोल रहे थे।40वीं रामभाऊ म्हालगी मेमोरियल लेक्चर सीरीज़ ठाणे के सरस्वती सेकेंडरी स्कूल में हो रही है। मंगलवार को इस लेक्चर सीरीज़ में विकास की राह पर पूर्वांचल के छठे फूल अतुल कुलकर्णी को बुना गया। इस मौके पर विधायक संजय केलकर, लेक्चर सीरीज़ के इस सेशन की चेयरपर्सन एडवोकेट वर्षा कोल्हटकर और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कई पुराने पदाधिकारी और कार्यकर्ता मंच पर मौजूद थे। अतुल कुलकर्णी ने कहा कि भारत के उत्तर-पूर्वी हिस्से पूर्वांचल में असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, त्रिपुरा, मिजोरम, नागालैंड और मेघालय राज्य शामिल हैं। अकेले अरुणाचल में पाँच सहायक नदियाँ और पाँच घाटियाँ हैं। महाभारत की कई घटनाओं और पुराने ज़माने की खासियतों का गवाह पूर्वांचल आज भी अपनी संस्कृति को बचाए हुए है, भले ही पहला मिशनरी 1814 में पूर्वांचल पहुँचा था। यह समझाते हुए कुलकर्णी ने पूर्वांचल के सस्टेनेबल डेवलपमेंट के लिए शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म प्लान की ज़रूरत बताई। उन्होंने यह भी साफ़ किया कि यह इलाका विकास की राह पर तेज़ी से तभी आगे बढ़ सकता है जब शिक्षा, इंडस्ट्री और इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान दिया जाए, साथ ही रेल कनेक्टिविटी, सड़क वगैरह जैसी ट्रांसपोर्ट की काफ़ी सुविधाएँ हों और डिजिटल कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम किया जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा