धान से दलहन तक: आत्मनिर्भरता की मिसाल बनी बिटावन बाई ध्रुव

धमतरी, 16 जनवरी (हि.स.)। प्रदेश में किसानों के हित में संचालित समर्थन मूल्य पर धान खरीदी व्यवस्था आज विश्वास और पारदर्शिता का प्रतीक बन चुकी है। इसका जीवंत उदाहरण धमतरी जिले के आमदी गांव की किसान बिटावन बाई ध्रुव हैं, जिनके चेहरे की मुस्कान उनकी मेहनत और सुचारू व्यवस्था की सफलता की कहानी बयां करती है।

बिटावन बाई ध्रुव ने अपने साढ़े चार एकड़ खेत में मेहनत से धान की फसल तैयार की। इस वर्ष उन्होंने 92 क्विंटल धान का उत्पादन किया, जिसे लेकर वे आमदी सहकारी समिति पहुंचीं। समिति में पहुंचते ही उन्हें ऑफलाइन टोकन की सुविधा सहजता से उपलब्ध हो गई। धान तौल, बारदाना, छाया एवं पेयजल जैसी व्यवस्थाएं समय पर और व्यवस्थित रूप से मिलने से उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हुई।

वे बताती हैं कि पहले धान बेचने को लेकर चिंता रहती थी, लेकिन अब पूरी प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और किसान हितैषी हो गई है। समय पर धान खरीदी और भुगतान की उम्मीद ने किसानों का भरोसा शासन-प्रशासन पर और अधिक मजबूत किया है।

अपने परिवार के बारे में बताते हुए बिटावन बाई ध्रुव कहती हैं कि उनके दो बेटे, बहू और नाती-पोते हैं तथा खेती ही उनके परिवार की आजीविका का मुख्य साधन है। धान बिक्री से प्राप्त राशि का उपयोग वे अपने नाती-पोतों की पढ़ाई में करेंगी, ताकि आने वाली पीढ़ी शिक्षित और आत्मनिर्भर बन सके।

इसके साथ ही वे रबी मौसम में दलहन फसल, विशेषकर चने की खेती कर रही हैं। धान से प्राप्त आय का एक बड़ा हिस्सा दलहन उत्पादन में निवेश किया जाएगा, जिससे आय में विविधता आएगी और मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहेगी। कुछ राशि से पुराने कर्ज का भुगतान कर आर्थिक बोझ कम करने की भी योजना है।

बिटावन बाई ध्रुव की यह कहानी दर्शाती है कि जब किसान-हितैषी नीतियां ज़मीन पर प्रभावी रूप से लागू होती हैं, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होती है। धान से शुरू हुई यह यात्रा शिक्षा, दलहन उत्पादन और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदमों की प्रेरक मिसाल है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा