शीतकालीन सत्र में पांच बैठकें, विधायी कार्यवाही और वित्तीय विषयों के कार्य किए गए संपन्न : विजेंद्र गुप्ता
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- Jan 12, 2026
नई दिल्ली, 12 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सोमवार को दिल्ली विधानसभा परिसर में एक प्रेस वार्ता को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि शीतकालीन सत्र 5 से 9 जनवरी तक आयोजित हुआ। सत्र के दौरान कुल पांच बैठकें हुईं और लगभग 12 घंटे 39 मिनट की कार्यवाही संपन्न हुई। सदन ने तारांकित एवं अतारांकित प्रश्नों, विशेष उल्लेखों, विधायी कार्यवाही तथा वित्तीय विषयों सहित व्यापक कार्य संपन्न किया।
विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि सत्र की शुरुआत उपराज्यपाल के अभिभाषण से हुई, जिसके पश्चात धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा हुई। इस प्रस्ताव पर सत्तापक्ष एवं विपक्ष दोनों के कुल 13 सदस्यों ने भाग लिया तथा प्रस्ताव को 09 जनवरी 2026 को सर्वसम्मति से पारित किया गया। सत्र के दौरान सदन ने अनेक महत्वपूर्ण विधायी, वित्तीय तथा जनहित से जुड़े विषयों पर चर्चा कर निर्णय लिए।
विधानसभा अध्यक्ष ने आगे बताया कि सदन में गीत ‘वंदे मातरम्’ में प्रचलित दो अनुच्छेदों के स्थान पर अगले सत्र से गीत का पूर्ण संस्करण बजाया जाएगा, जिसे सत्तापक्ष एवं विपक्ष दोनों के सदस्यों द्वारा सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव के अनुरूप लागू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सदन ने पूर्व विधायक राजेश गहलोत, पूर्व सांसद एवं विपक्ष के नेता प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा, पूर्व विधायक विनय शर्मा, तथा लाल किले के पास कार विस्फोट में मारे गए 15 व्यक्तियों के प्रति शोक व्यक्त किया और उनकी स्मृति में दो मिनट का मौन रखा।
उन्होंने कहा कि पूरे सत्र की कार्यवाही संवैधानिक मूल्यों, लोकतांत्रिक परंपराओं और सदन की गरिमा के अनुरूप संचालित की गई।
सदन की कार्यवाही के संचालन के संदर्भ में अध्यक्ष ने कहा कि विधानसभा लोकतांत्रिक संवाद का मंच होने के साथ-साथ अनुशासन और मर्यादा के पालन के लिए भी वचनबद्ध है। बार-बार के व्यवधान के कारण कुछ विपक्षी सदस्यों को निलंबित करना पड़ा तथा कुछ सदस्यों के नाम लिए गए ताकि सदन की गरिमा बनी रहे।
सत्र के दौरान कुल 351 प्रश्न सूचना-पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 60 तारांकित तथा 263 अतारांकित प्रश्न स्वीकार किए गए। इसके अतिरिक्त 124 विशेष उल्लेख प्राप्त हुए, जिनमें से 33 विशेष उल्लेख संबंधित विभागों को प्रेषित किए गए हैं और 30 दिनों के भीतर उत्तर देने के निर्देश दिए गए हैं।
सत्र के दौरान सदन में गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहादत वर्षगांठ, राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ, तथा दिल्ली में पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े उपायों पर विस्तृत चर्चा हुई और सभी दलों के सदस्यों ने सार्थक भागीदारी की।
विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए, जिनमें, कोर्ट फीस दिल्ली संशोधन विधेयक, 2026, दिल्ली विनियोग (संख्या-एक) विधेयक, 2026, दिल्ली जन विश्वास संशोधन प्रावधान विधेयक, 2026, दिल्ली दुकान एवं स्थापना संशोधन विधेयक, 2026, इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए अनुपूरक मांगों को भी सदन ने स्वीकृति दी, जिससे विकास कार्यों एवं कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को सुदृढ़ता मिलेगी।
हालिया विवादों पर स्पष्ट करते हुए अध्यक्ष ने कहा कि यह दावा जिसमें कहा गया कि सदस्यों को केवल मास्क पहनने के कारण निलंबित किया गया, पूर्णतः असत्य एवं भ्रामक है। निलंबन सदन की कार्यवाही में जानबूझकर बाधा डालने के कारण ही किए गए हैं।
यह मामला नियमों के अनुरूप विशेषाधिकार समिति को संदर्भित किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि सिख गुरुओं के संबंध में कथित टिप्पणियों का मामला भी विशेषाधिकार समिति को भेजा गया है तथा संबंधित वीडियो दिल्ली राज्य फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला को जांच के लिए भेजा गया है।
विजेंद्र गुप्ता ने स्पष्ट किया कि उक्त प्रकरण विपक्ष के नेता द्वारा की गई कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियों से उत्पन्न हुआ। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष द्वारा अत्यंत संयम और सांवैधानिक एवं संसदीय मानकों के अनुरूप कार्य किया गया तथा कोई तत्काल अथवा मनमाना निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने निर्देश दिया कि बोले गए सटीक शब्दों को शब्दशः अभिलेखित किया जाए, सदस्यों द्वारा उठाई गई आपत्तियों एवं कार्यवाही की मांग को संज्ञान में लिया जाए तथा तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाए। 07 से 09 जनवरी के मध्य विभिन्न बैठकों में हुई समस्त कार्यवाही का विस्तृत अभिलेखन किया गया तथा संपूर्ण घटनाक्रम को अभिलेख पर रखा गया, ताकि पूर्ण पारदर्शिता एवं सार्वजनिक उत्तरदायित्व सुनिश्चित हो सके।
प्रेस वार्ता के दौरान विजेंद्र गुप्ता ने यह गंभीर चिंता भी व्यक्त की कि सदन के बाहर, यहां तक कि दिल्ली के अधिकार क्षेत्र से बाहर भी, ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं जिनसे विशेषाधिकार समिति में लंबित मामले को प्रभावित करने का प्रयास होता है। उन्होंने कहा कि जब किसी विषय पर सदन संज्ञान ले चुका हो और जांच प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी हो, तो उसे प्रभावित करने का कोई भी प्रयास संविधानिक शिष्टाचार का उल्लंघन तथा विधानमंडल की गरिमा पर आघात है। तथ्यात्मक कालक्रम को देश एवं जनता के समक्ष रखने के उद्देश्य से सत्र के दौरान घटित घटनाओं का क्रमानुसार वीडियो संकलन जारी किया गया।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सदन का निर्णय सदन की भावना के अनुरूप, यहां तक कि विपक्ष के आग्रह पर भी, लिया गया था। इसके बाद की अनुपस्थिति एवं जनभावनाओं को उकसाने के प्रयास अत्यंत गैर-जिम्मेदाराना एवं अस्वीकार्य हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि विधानसभा पारदर्शिता, जनभावनाओं के सम्मान और शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध उपयुक्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
अध्यक्ष ने पुनः आश्वस्त किया कि इस विषयक जांच की प्रत्येक अवस्था में सभी सदस्यों की भावनाओं एवं चिंताओं का पूरा सम्मान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विधानसभा की गरिमा, अधिकार और संवैधानिक विशेषाधिकार सर्वोपरि हैं तथा समस्त कार्यवाही संविधान, स्थापित संसदीय परंपराओं, शुचिता, निष्पक्षता और लोकतांत्रिक जवाबदेही के सिद्धांतों के अनुरूप संचालित की जाती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव



