पूर्व राजा ज्ञानेंद्र की चेतावनी, कहा- नेपाल के अस्तित्व पर संकट का बादल

काठमांडू, 10 जनवरी (हि.स.)। नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह ने देश की वर्तमान स्थिति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि अब नेपाल के अस्तित्व पर ही संकट मंडरा रहा है और यह संकट पहले की तुलना में कहीं अधिक गंभीर है।

304वें पृथ्वी जयंती एवं राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि पहले चिंता इस बात की होती थी कि नेपाल का निर्माण होगा या नहीं, लेकिन आज यह डर पैदा हो गया है कि क्या देश को बचाया भी जा सकेगा या नहीं।

ज्ञानेंद्र शाह ने कहा कि नारायणहिटी राजमहल छोड़ने के लगभग दो दशक बाद भी देश में जारी राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक संकटों ने उन्हें अत्यंत चिंतित कर दिया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि नेपाल केवल भाषणों, जादू या चमत्कारों से नहीं बन सकता। इसके लिए सभी जातियों, धर्मों और क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्थाओं — जिनमें राजशाही भी शामिल है — को राष्ट्रीय जिम्मेदारी की भावना के साथ कार्य करना होगा।

ज्ञानेन्द्र शाह ने अपने संदेश में कहा कि राजशाही सभी नेपाली जनता की साझा प्रतिनिधि संस्था रही है और जनता द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारी से वह ऐसे ही किनारा नहीं कर सकती।”

उन्होंने नागरिकों से ‘पृथ्वी पथ’ — अर्थात पृथ्वी नारायण शाह की एकीकरण की दृष्टि — का अनुसरण करते हुए अपने राष्ट्रीय कर्तव्य का निर्वहन करने का आह्वान किया।

अपने संदेश में पूर्व राजा ने कहा कि लगभग दो दशक पहले शांति, आर्थिक विकास और स्थिरता का वादा कर सत्ता में आई राजनीतिक पार्टियों ने राजशाही से हटने को कहा था, और उन्होंने सद्भावना के साथ उस आग्रह को स्वीकार किया था।

उन्होंने कहा, “करीब दो दशक पहले जब राजनीतिक दलों ने शांति, विकास और स्थिरता लाने का वादा किया था, तब हमने जनता का भरोसा जनता की ही संस्थाओं को सौंपते हुए ताज त्याग दिया और सहयोग की भावना से शासन से अलग हो गए।”

पूर्व राजा का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब नेपाल में राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ती जा रही है और देश के भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास