जी राम जी अधिनियम ग्रामीण भारत के सशक्तीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी पहल : एके शर्मा
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- Jan 10, 2026

जौनपुर ,10 जनवरी (हि.स.)। यूपी के जौनपुर में प्रभारी मंत्री ए.के. शर्मा ने विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) जी-राम-जी योजना अधिनियम पर रविवार को कलेक्ट्रेट सभागार में पत्रकारों से बातचीत की और इस नए अधिनियम को ग्रामीण भारत के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी पहल बताया। प्रभारी मंत्री ने कहा कि यह अधिनियम ग्रामीण श्रमिकों, किसानों और मेहनतकश वर्ग के जीवन में व्यापक और सकारात्मक परिवर्तन लाएगा। उन्होंने इसे ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया।विकसित भारत जी-राम-जी अधिनियम की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता बेरोजगारी भत्ता को एक वास्तविक और प्रभावी कानूनी अधिकार बनाना है। पूर्ववर्ती मनरेगा अधिनियम में अनेक शर्तों के कारण बेरोजगारी भत्ता मिल पाना कठिन था, जबकि नए अधिनियम में अनावश्यक प्रतिबंधों को समाप्त कर दिया गया है। अब यदि श्रमिक द्वारा कार्य की मांग के बावजूद समय से रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो बेरोजगारी भत्ता स्वतः देय होगा। इससे श्रमिकों को उनके अधिकार आसानी से मिल सकेंगे।मजदूरी भुगतान की व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाया गया है। यदि किसी कारणवश मजदूरी भुगतान में देरी होती है, तो प्रत्येक विलंबित दिन का मुआवजा मजदूरी के साथ श्रमिक को दिया जाएगा। इससे श्रमिकों के शोषण पर प्रभावी रोक लगेगी और उन्हें उनके श्रम का पूरा लाभ समय पर मिलेगा।कृषि (बुवाई और कटाई) के समय में वर्ष में अधिकतम 60 दिवसों हेतु कार्य बंद रखे जाने का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य कृषि कार्य को निर्वाध रूप से संचालित करना और श्रमिकों की उपलब्धता कम न होने देना है।ग्राम सभा के माध्यम से ग्राम पंचायत द्वारा विकसित ग्राम पंचायत योजना तैयार की जाएगी, जिसमें ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता अनिवार्य होगी। इससे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यों का चयन होगा और गांवों का समग्र एवं संतुलित विकास सुनिश्चित किया जा सकेगा। मंत्री ने कहा कि विकसित भारत जी-राम-जी अधिनियम ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और सामाजिक-आर्थिक मजबूती प्रदान करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है, जिसका लाभ आने वाले वर्षों में देश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।
हिन्दुस्थान समाचार / विश्व प्रकाश श्रीवास्तव



