कोलकाता, 15 जनवरी (हि.स.)। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारत का इतिहास अब बंद कमरों और अभिलेखागारों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि डिजिटल तकनीक के माध्यम से आम लोगों और शोधकर्ताओं तक पहुंचेगा। वे गुरुवार को कोलकाता प्रवास के दौरान एशियाटिक सोसाइटी के 243वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे।
शेखावत ने एशियाटिक सोसाइटी को भारत की सभ्यतागत स्मृति और बौद्धिक धरोहर का महत्वपूर्ण केंद्र बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन ‘विरासत भी, विकास भी’ पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संस्कृति मंत्रालय के ज्ञान भारतम् मिशन के तहत देश की एक करोड़ से अधिक पांडुलिपियों को संरक्षित और डिजिटल करने का कार्य तेज गति से चल रहा है।
उन्होंने बताया कि 15 जनवरी 1784 को सर विलियम जोन्स द्वारा स्थापित एशियाटिक सोसाइटी आधुनिक इंडोलॉजी, भाषा विज्ञान और वैज्ञानिक अध्ययन की आधारशिला रही है। यहां संरक्षित लगभग 27 हजार संस्कृत पांडुलिपियां और दुर्लभ ग्रंथ भारत के गौरवशाली अतीत के जीवंत साक्ष्य हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ज्ञान भारतम् मिशन का उद्देश्य पांडुलिपियों का वैज्ञानिक सूचीकरण और डिजिटलीकरण है। अब तक 52 लाख पांडुलिपियों का दस्तावेजीकरण पूरा हो चुका है। पांडुलिपियों के प्रतिलेखन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है ताकि उनकी प्रामाणिकता बनी रहे। वर्तमान में लगभग 76 हजार पांडुलिपियां namami.gov.in पोर्टल पर निःशुल्क उपलब्ध हैं।
शेखावत ने बताया कि नेशनल आर्काइव्स के 4.5 करोड़ पृष्ठों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है, जो अभिलेख पटल पोर्टल पर उपलब्ध हैं। वहीं, सी-डेक के सहयोग से विकसित ‘जतन’ सॉफ्टवेयर के माध्यम से इंडियन म्यूजियम और विक्टोरिया मेमोरियल सहित देश के 10 प्रमुख संग्रहालयों के संग्रह को ऑनलाइन किया गया है।
उन्होंने कहा कि नेशनल मिशन ऑन कल्चरल मैपिंग के तहत अब तक 4.5 लाख गांवों की सांस्कृतिक प्रोफाइल तैयार की जा चुकी है, जिससे लोक संगीत, शिल्प और स्थानीय परंपराओं को संरक्षित किया जा रहा है।
इससे पहले केंद्रीय मंत्री ने ललित कला अकादमी के क्षेत्रीय केंद्र का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि 26 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह परिसर बंगाल की समृद्ध कला परंपरा को वैश्विक मंच से जोड़ेगा। तृतीय प्रिंट बिएनाले इंडिया में 34 देशों के कलाकारों की भागीदारी भारत की बढ़ती सांस्कृतिक सॉफ्ट पावर को दर्शाती है।
मेटकाफ हॉल कार्यक्रम में शेखावत ने कहा कि ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा निरंतर किया जा रहा है और मेटकाफ हॉल को ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत एक क्षेत्रीय ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
-------------
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर



