बेलडांगा हिंसा के बाद बंगाल के राज्यपाल ने जारी की सुरक्षा सलाह, भविष्य में हिंसा रोकने पर जोर

कोलकाता, 20 जनवरी (हि. स.)। मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में पिछले सप्ताह दो दिनों तक चले तनाव और हिंसा के मद्देनजर राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस ने मंगलवार को ममता बनर्जी सरकार के लिए एक विस्तृत सुरक्षा परामर्श (सिक्योरिटी एडवाइजरी) जारी की है। यह हिंसा कथित तौर पर झारखंड में उसी जिले के एक प्रवासी श्रमिक की हत्या के विरोध में भड़की थी।

राज्यपाल कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि हाल के अनुभवों से यह स्पष्ट हुआ है कि असामाजिक और विघटनकारी तत्व कुछ ही घंटों में सैकड़ों उग्र और प्रेरित प्रदर्शनकारियों को जुटाने में सक्षम होते हैं। इस तरह की त्वरित उग्रता आम नागरिकों के लिए गंभीर परेशानियां खड़ी करती है, सामान्य जनजीवन को बाधित करती है और जान-माल के लिए बड़ा खतरा बन जाती है।

इसी पृष्ठभूमि में राज्यपाल ने हिंसा को रोकने, उसके विस्तार और नियंत्रण से बाहर जाने से बचाने तथा उससे उत्पन्न अव्यवस्था को टालने के लिए सक्षम प्राधिकारियों के विचारार्थ एक सुरक्षा सलाह जारी की है।

राज्य सरकार को दी गई इस सलाह में कुल 15 बिंदु शामिल हैं। इनमें प्रमुख रूप से केंद्रीय और राज्य खुफिया एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के जरिए खुफिया तंत्र को मजबूत करने, स्थानीय मुखबिर नेटवर्क को सक्रिय करने, रियल-टाइम खुफिया जानकारी एकत्र करने और उसका विश्लेषण करने की व्यवस्था, मौजूदा संवेदनशील और भड़काऊ मुद्दों का अध्ययन करने तथा संघर्ष के केंद्र बिंदुओं पर विशेष ध्यान देने पर जोर दिया गया है।

राज्यपाल कार्यालय के बयान में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल की अंतरराष्ट्रीय सीमाएं व्यापक और कई स्थानों पर छिद्रपूर्ण हैं, तथा सीमा के दोनों ओर संवेदनशील मुद्दे सामने आते रहते हैं। ऐसे में केंद्र और राज्य द्वारा संयुक्त खुफिया तंत्र को प्रभावी ढंग से स्थापित किया जाना आवश्यक है।

सलाह में अन्य बिंदुओं के तहत सतर्कता बनाए रखने और सक्रिय गश्त, समुदायों के साथ संवाद कर विश्वास बहाल करने, कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने से रोकने के लिए प्रभावी निवारक उपाय, उकसावे में शामिल तत्वों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई, तनाव कम करने के लिए स्थानीय नेताओं के साथ समन्वय तथा संवेदनशील जिलों में निगरानी बढ़ाने की सिफारिश की गई है।

राज्यपाल आनंद बोस ने संकट कॉल पर त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने, भीड़ नियंत्रण में संयम बरतने और कानून-व्यवस्था की स्थिति को बिगड़ने से रोकने अथवा उसे शांत करने के लिए स्थानीय नेतृत्व के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने पर भी जोर दिया है।

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर